इंदौर
समाधी सम्राट गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के कुल गौरव उच्चारणाचार्य आचार्य विनम्र सागर जी महाराज का बड़ा उद्घोष — जैन जगत में हर्ष की लहर, गुरु भक्तों में खुशी का माहौल
राजेश जैन दद्दू
*इंदौर / परम पूज्य तीर्थ चक्रवर्ती निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज को लेकर जैन जगत में चल रही प्रतीक्षा और चर्चाओं के बीच आखिरकार संत संघ की ओर से एक बहुत बड़ा और निर्णायक उद्घोष सामने आया है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि
उच्चारणाचार्य, परम पूज्य आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने पावन मुखारविंद से अपनी मंगल देशना में समाज को संबोधित करते हुए कहा है कि—
> “सुधा सागर जी महाराज मुनि होते हुए भी आचार्य के समान हैं,वे शत प्रति शत आचार्य पद के योग्य हैं।”
आचार्य श्री के इस एक वाक्य ने पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में एक नई ऊर्जा और विश्वास भर दिया है।
आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि।
सुधासागर महाराज जी ने कल बहुत अच्छे आचार्य के निर्णायक शब्द बोले, तो मुझे लगता है सुधासागर जी अब आचार्य पद के योग्य हैं, बिल्कुल। जिन मुनि के वचन आचार्य के समान हैं, जिन मुनि के वचन बिल्कुल निर्णायक हैं, आचार्य के समान हैं, वे मुनि आचार्य के समान ही हैं
> “जिस मुनि की बात आगम से युक्त होती है, उस बात को सभी मानते हैं। उनकी बात आचार्यों के समान है, वे आचार्य जैसे ही हैं जो ऐसी बात कहते हैं, इस तरह की स्पीच देते हैं, प्रवचन देते हैं जो प्रवचन आचार्यों से प्रमाणित होते हैं, जिनकी बात खंडित नहीं होती, वे मुनि भी आचार्य के समान होते हैं।”
आचार्य श्री विनम्र सागर जी ने कहा — “सुधा का सागर”
इस उद्घोष के मायने क्या हैं?
1. आगम के ज्ञाता: सुधासागर जी के प्रवचन केवल प्रवचन नहीं, आगम प्रमाणित होते हैं, जिन्हें कोई खंडित नहीं कर सकता।
2. निर्णायक वाणी: उनके शब्द आचार्यों की तरह निर्णायक होते हैं, जो संघ में अंतिम सत्य माने जाते हैं।
3. आचार्य तुल्य आचरण: मुनि पद पर रहते हुए भी उनका विहार, उनका अनुशासन, उनके संघ का संचालन आचार्य के समान है।
आओ जाने कौन हैं आचार्य श्री विनम्र सागर जी अनुभव समृद्ध आचार्य है। जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाए रे इस बहुचर्चित छंद काव्य के रचयिता भी है। संस्कृत, प्राकृत और मंत्र साधना के अद्वितीय विद्वान हैं। उनका कहा हुआ एक-एक शब्द शास्त्र सम्मत होता है। ऐसे महान आचार्य के मुख से सुधासागर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विचार व्यक्त करना अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण एवं विचारणीय है।
कौन हैं मुनि श्री सुधासागर जी?
संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, करोड़ों युवाओं के प्रेरणा स्रोत, श्रावक संस्कार शिविर एवं जिज्ञासा समाधान प्रवर्तक हैं , उनका ज्ञान घाट तीनों लोकों के ज्ञान से समृद्ध है और यही कारण है की उनके प्रवचन एवं जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम में लोग दूर-दूर से चले आते हैं ।उनके एक इशारे पर हजारों युवा जैन धर्म की ओर लौट आते हैं। उनके प्रवचनों में हास्य, करुणा, तर्क और आगम का अद्भुत संगम होता है। दद्दू ने कहा कि भारत वर्षीय जैन समाज की मांग हुई बुलंद सकल जैन समाज में एक ही आवाज गूंज रही है — “जो मुनि आचार्य के समान है, उसे आचार्य पद पर शोभायमान होना ही चाहिए।” भक्तों का कहना है कि आचार्य विनम्र सागर जी ने तो हमारे मन की बात कह दी जो अवश्य ही फली भूत होगी।
॥ सुधा सागर की जय, आचार्य पद का जयघोष ॥*
नमोस्तु शासन जयवंत हो। राजेश जैन दद्दू धर्म समाज प्रचारक

