ग्वालियर। भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों को अपनाना जरूरी है। केवल भारत माता की जय बोलने से देश मजबूत नहीं होगा, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में स्वदेशी अपनाना होगा। जब हम स्वयं स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे और परिवार को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे, तभी देश आर्थिक रूप से समृद्ध बनेगा। इसी संदेश के साथ स्वदेशी मेला दीपोत्सव 2026 के सातवें दिन मंगलवार को निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें विद्यालयों और महाविद्यालयों के 50 विद्यार्थियों ने भाग लेकर स्वदेशी के महत्व को अपने विचारों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता का विषय ‘स्वदेशी अपनाना है, भारत को सशक्त बनाना है’ रखा गया था। विद्यार्थियों ने अपने निबंधों में स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, देश की आर्थिक मजबूती और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्वदेशी को केवल विचार तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। प्रतियोगिता में डॉ. गिरीश पाल, डॉ. भारतेंदु चौधरी और डॉ. संविधा सिंह ने निर्णायकों की भूमिका निभाई। निर्णायकों ने अपने उद्बोधन में स्वदेशी अपनाने और देश की आर्थिक उन्नति में योगदान देने का संदेश दिया।
स्लोगन प्रतियोगिता में पंचपरिवर्तन का संदेश
मेले की सांस्कृतिक गतिविधियों के तहत पिछले दिन पंचपरिवर्तन विषय पर स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसमें विद्यालयों और महाविद्यालयों के 30 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विद्यार्थियों ने आकर्षक नारों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया। बुधवार, 28 अक्टूबर को पर्यावरण संरक्षण की थीम पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
गरबा, घूमर और भरतनाट्यम ने मोहा मन
शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित माधव विधि महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने विविध प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। गुजरात के गरबा, राजस्थान के घूमर, केरल के कथक और तमिलनाडु के भरतनाट्यम के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई गई। लोकगीतों के जरिए भारतीय सभ्यता, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया।
नुक्कड़ नाटक से दिया पंचपरिवर्तन का संदेश
लोकनृत्य और लोकगीतों के साथ विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पंचपरिवर्तन का संदेश दिया। वहीं, भजन क्लबिंग की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम का संचालन सुश्री रेखा गंभीर और सुश्री शीतल कुशवाहा ने किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कु. अर्जेंता सिंह के निर्देशन में हुईं, जबकि शाम के कार्यक्रम का संचालन डॉ. शीतल जैन ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के पूर्व छात्र भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में स्वदेशी, भारतीय संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन के संदेश प्रमुखता से उभरे।

