इंदौर। दिगंबर जैन समाज के इतिहास में एक अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय क्षण इंदौर में देखने को मिला। श्रावक संस्कार शिविर एवं पर्वराज दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर परम पूज्य, जगतपूज्य तीर्थ चक्रवर्ती महाश्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ने अपने कर-कमलों से लगभग 6000 शिवरार्थी श्रावकों के मस्तक पर भगवान की शांतिधारा का पावन गंधोदक अपने हाथों से लगाकर आशीर्वाद प्रदान किया। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि
इस पल का इंतजार हर शिवरार्थी पूरे वर्ष करता है, आज वह पावन पल साकार हो गया। दलालबाग स्थित विध्या सुधा देशना मंडप एवं विशाल पांडाल में हजारों की संख्या में श्रावक-शिवरार्थी श्रद्धा के साथ पंक्ति बंद्ध बैठे थे। पूज्यवर महाश्रमण के आगमन के साथ ही जयकारों से आकाश गूंज उठा।
एक महातपस्वी साधक और 6000 मस्तक – करुणा का अद्भुत संगम
एक ओर 68 वर्ष की आयु के तपस्वी, निरंतर साधनारत संत और दूसरी ओर लगभग 6000 मस्तक। हर मस्तक तक पहुँचना, हर व्यक्ति को अपने स्नेह और वात्सल्य से स्पर्श करना – यह केवल एक दृश्य नहीं था, बल्कि जगतपूज्य की असीम अनुकंपा करुणा, ममता और अदम्य पुरुषार्थ का साक्षात दर्शन था। दद्दू ने बताया कि
घंटों तक पूज्यवर अपनी करुणा बरसाते रहे। न चेहरे पर थकान दिखाई दी, न विश्राम की चिंता। एक के बाद एक शिवरार्थी उनके चरणों में नतमस्तक होता रहा और गुरुदेव अपने हाथों से गंधोदक हजारों मस्तकों पर लगाकर भक्तों को कृतार्थ करते रहे। वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने एवं उपस्थित समाजजनों ने
भाव-विभोर होकर कहा – “इतनी शक्ति कहाँ से आती है? यह रहस्य तो स्वयं महाश्रमण जगतपूज्य ही जानें। जहाँ परोपकार ही जीवन का लक्ष्य हो, वहाँ शरीर की सीमाएँ भी मानो छोटी पड़ जाती हैं।”
क्या है गंधोदक का महत्व
जैन धर्म में भगवान के अभिषेक शांतिधारा के जल को गंधोदक कहा जाता है। इसे परम पवित्र और पापों का नाश करने वाला माना जाता है। श्रीजी के गंधोदक को मस्तक पर धारण करना मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना माना जाता है।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में इंदौर सहित मालवा-निमाड़ के हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने गुरुदेव के दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना की। चक्रवर्ती नवीन गोधा ने कहा कि
नमन है जगतपूज्य गुरुदेव आपको और आपकी तपस्या को।
– प्रेषक :-
राजेश जैन दद्दू
प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद,

