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पार्श्वनाथ भगवान के निर्वाण महोत्सव पर निकली भव्य पालकी यात्रा, गूंजे जयकारे

जसवंतनगर। भगवान पारसनाथ के निर्वाण कल्याणक महोत्सव के अवसर पर जैन समाज द्वारा भव्य पालकी यात्रा एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पालकी यात्रा नगर भ्रमण करते हुए जैन मंदिर से प्रारंभ हुई। यात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पुरुष श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण कर पालकी को अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे। पालकी यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए लुधपुरा मंदिर पहुंची और इसके बाद पुनः जैन मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।यात्रा के उपरांत मूल वेदी पर विराजमान भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रथम शांतिधारा अनिल नलिन जैन चदौरिया परिवार द्वारा तथा द्वितीय शांतिधारा संजय जैन उत्कर्ष, प्रखर जैन परिवार द्वारा की गई। भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भगवान के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित किया।
चातुर्मास कर रहे मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज के प्रवचन से पूर्व प्रांशु जैन पारस एवं मोहित जैन ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया।इस अवसर पर प्रवचन करते हुए मुनि श्री भाव सागर महाराज ने कहा कि बैर से बैर कभी समाप्त नहीं होता। भगवान पार्श्वनाथ ने कमठ के उपसर्गों को सहन करते हुए कर्मठता और धैर्य का परिचय दिया तथा वीतराग अवस्था को प्राप्त किया। उन्होंने दस भवों के बैर को सहन किया और अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त की।
मुनिश्री ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से हमें क्षमा, धैर्य, संयम और आत्मविजय की प्रेरणा लेनी चाहिए। यदि कोई हमारे साथ बैर रखता है तो हमें भी उसके प्रति वैर का भाव नहीं रखना चाहिए। क्षमा और संयम के मार्ग पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

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