अतीत से सीख, वर्तमान में नवाचार, तभी बनेगा बेहतर भविष्य- पवैया

ग्वालियर। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय एवं विद्यार्थी कल्याण न्यास के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एग्रीविजन के द्वितीय क्षेत्रीय सम्मेलन में कृषि के भविष्य, नवाचार और विद्यार्थियों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा कि “अतीत को पढ़ो, वर्तमान को गढ़ो और आगे बढ़ो, तभी बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।” उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण ही एग्रीविजन का मूल उद्देश्य है।
पवैया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में प्रगति के लिए अनुसंधान और नवीन तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। यदि हम जिज्ञासा और नवाचार की ओर नहीं बढ़ेंगे, तो अपेक्षित सुधार संभव नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “विकलांग” के स्थान पर “दिव्यांग” और मोटे अनाज को “श्रीअन्न” जैसे सकारात्मक शब्दों के प्रयोग को समाज में सोच बदलने का उदाहरण बताया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रघुराज किशोर तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय कृषि प्रणाली की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने कृषि शिक्षा को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के साथ जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने ऋग्वेद का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल में भी कृषि को यज्ञ के समान महत्व दिया गया है। उन्होंने रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मां के दूध में भी रासायनिक तत्वों के अंश पाए जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। इसलिए आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक खेती का संतुलन आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अरविंद कुमार शुक्ल ने कहा कि एग्रीविजन कार्यक्रम भविष्य की खेती और विद्यार्थियों के विजन को दिशा देने वाला मंच है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश की मृदा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, गंधक और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है। लगभग 36 प्रतिशत मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की कमी (हिडन हंगर) पाई जा रही है, जिसे दूर करना आवश्यक है।
उन्होंने जल संरक्षण और प्रबंधन पर भी जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बिना सतत कृषि संभव नहीं है। विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती, विविधीकरण और आधुनिक तकनीकों के समन्वय के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने “स्वयं का निर्माण ही देश का निर्माण है” का संदेश देते हुए युवाओं को आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में आयोजन सचिव सत्यप्रकाश सिंह तोमर ने स्वागत भाषण दिया, जबकि सह संयोजक निखिल खरे ने आभार व्यक्त किया। सह संयोजक शिवम पांडे ने एग्रीविजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री चेतस जी सुखाड़िया, मध्यभारत प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री श्री रोहित दुबे, एग्रीवीजन के संयोजक श्री विक्रम फर्शवान जी भी उपस्थित रहें। मंच संचालन महक जैन द्वारा किया गया।
विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. मृदुला बिल्लौरे, निदेशक अनुसंधान सेवायें डॉ. आर.ए. कौशिक, निदेशक शिक्षण एवं छात्र कल्याण डॉ. प्रदीप कुमार, निदेशक विस्तार सेवाएं एवं कृषि महाविद्यालय, ग्वालियर के अधिष्ठाता डा वायपी सिंह एवं समस्त कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता आदि एवं प्रमंडल सदस्य ,वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहें

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