संग्रहवृति दुःख का कारण है, “उत्तम त्याग धर्म” सुखी बनाता है – भावलिंगी संत श्री दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज
उत्तम त्याग धर्म आत्मा के राग-द्वेष आदि काषायिक भावों का अभाव होना ही वास्तविक त्याग धर्म है। चार प्रकार के दान भी इसी त्याग धर्म के अन्तर्गत आते हैं। साधना का सच्चा आनन्द राग में नहीं अपितु त्याग में ही है। निस्वार्थ भाव से दिया गया दान ही त्याग धर्म है। उत्तम त्याग धर्म –…

