देहरा-तिजारा। विश्व प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र श्री देहरा-तिजारा में चल रहे 31वें पावन चातुर्मास के अंतर्गत भावलिंगी संत, दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज के पावन सानिध्य में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस श्रद्धा, राष्ट्रभक्ति एवं संस्कारमय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन श्री चन्द्रतीर्थ मंडपम् में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, गुरुभक्तों तथा विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया की कार्यक्रम के दौरान आचार्य भगवंत श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ने भारत की गौरवशाली आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत देश को पूर्वकाल में “देवभूमि” कहा जाता था। चक्रवर्ती भरत के पिता प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री ऋषभदेव थे। भगवान ऋषभदेव के प्रथम पुत्र चक्रवर्ती भरत के नाम से इस पवित्र भूमि का नाम “भारत” पड़ा। भारत केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि त्याग, तप, संयम, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है।आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से यह प्रश्न करे कि क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं? क्या हम क्रोध, अभिमान, आलस्य, धनलिप्सा और ईर्ष्या जैसी बुराइयों के गुलाम तो नहीं हैं? क्या हम अपने से अधिक सफल व्यक्ति को देखकर ईर्ष्या नहीं करते? क्या स्वतंत्रता के नाम पर हम स्वच्छंदता की ओर तो नहीं बढ़ रहे हैं? क्या हम नशीले पदार्थों जैसी बुराइयों के शिकार तो नहीं बन रहे हैं?
उन्होंने कहा कि यदि भारतीय नागरिक इन बुराइयों को अपने जीवन से अलग कर पाए, तभी वह वास्तविक अर्थों में स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र नागरिक कहलाने का अधिकारी होगा। स्वतंत्रता केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करना भी है।आचार्य श्री ने कहा कि भारत में सभी धर्म एवं सम्प्रदायों को समान सम्मान दिया जाता है। सच्चे भारतीय का कर्तव्य है कि वह किसी भी धर्म-सम्प्रदाय की पहचान एवं धार्मिक चिन्हों को मिटाने का प्रयास न करे, बल्कि सभी की आस्था का सम्मान करते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करे।उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की विशेषता बताते हुए कहा कि यदि तिरंगा प्रत्येक सम्प्रदाय और प्रत्येक नागरिक की भावनाओं का ध्वज बन जाए तो यही भावना भारत को एकता के सूत्र में बांधकर विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे ले जा सकती है। उन्होंने तिरंगे में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक भावनाओं को देखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि राष्ट्रध्वज हमें एकता, समरसता और राष्ट्रीय गौरव का संदेश देता है।31वें पावन चातुर्मास में विराजमान आचार्य संघ के सानिध्य में आयोजित इस स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारतवर्ष से आए सैकड़ों गुरुभक्तों के साथ MLP विद्यालय, अगस्त्य विद्यालय एवं जैन विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया।कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों, भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा प्राप्त हुई।इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन, रवि जैन, टोनी जैन, नीरज जैन (नीनू), अनिल जैन,अंशुल जैन एवं अमन जैन सहित मंदिर समिति, चातुर्मास समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति, धर्म, संस्कार एवं समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखने के संकल्प के साथ हुआ।
देहरा-तिजारा में आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज के सानिध्य में मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस

