मेरठ ने 35 पीछीधारी साधकों के साथ मनाया भगवान महावीर जन्म कल्याणक 30. मार्च 2026) वर्तमान शासन नायक तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का मनाया
2625 वाँ जन्म कल्याणक महा महोत्सव । सम्पूर्ण भारत वर्ष एवं देश-विदेश में भगवान महावीर स्वामी के आदर्शों का दोहराया गया। भगवान महावीर स्वामी की सर्वव्यापी एवं लोक कल्पाणी मौलिक शिक्षाओं को अपनी दिनचर्या में अवतरित करने का आहवान किया गया ताकि प्रत्येक नागरिक व्यक्तिगत रूप से विश्व शान्ति महायज्ञ में अपनी-अपनी एक भाव आहूति समर्पित कर सके ।
उत्तरप्रदेश में मेरठ को मिला विशाल आचार्य संघ का परम पावन सौभाग्य सानिध्य महानगर मेरठ धर्मधरा को इस बार सातिशय पुष्य योग से चतुर्विध संघ का सानिध्य सौभाग्य प्राप्त हुआ । जी हाँ, युग के महासंत “जीवन है पानी की बूरै” महाकाव्य के मूल रचनाकार भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ जहाँ आचार्य प्रवर के साथ 10 मुनिराज, 17 आर्थिका माताजी, 06 सुल्लिका माताजी, 01 क्षुल्लक जी एवं अनेकों त्यागी व्रती गण विराजमान हैं। इतिहास के पन्नों में यह पहला स्वर्णिम अवसर है जो इतने बड़े साधु संघ का सानिध्य मेरठ को मिला है। चतुर्विध संघ के सानिध्य को पाकर मेरठ महानगर में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।
मेरठ जैन समाज अध्यक्ष सुरेश जैन ‘ऋतुराज’ ने कहा भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक हमने अनेकों मनाये होंगे लेकिन चतुर्विध संघ में 35 पीछीधारी साधक-साधिकाओं का मंगल सानिध्य हमारे मेरठ समाज को प्रथम बार प्राप्त हुआ है। सच कहूँ, आचार्य श्री एवं सम्पूर्ण संघ को देखकर मैं कह पा रहा है कि साधु की चर्या एवं सरलता चतुर्थ काल में ऐसी ही रहती होगी।
भगवान महावीर रथयात्रा से हुयी नगर में जिनागम पंथ की प्रभावना धर्मनगरी मेरठ के तीरगरान दिगम्बर जैन मन्दिर से श्रीजी की द्वय रथ यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुये शारदा रोड़ स्थित महावीर जयन्ती भवन में पहुंची। रथयात्रा में धर्मात्मा श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
महावीर जयन्ती भवन में उपस्थित विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुये कहा आज वर्तमान शासन नायक अंतिम तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याठाक महामहोत्सव है, इसका तात्पर्य है कि भगवान महावीर से पूर्व भी 23 तीर्थकर हो चुके थे जो इस धरा पर धर्मतीर्थ का प्रवर्तन करते रहे। बन्धुओ ! आज सर्वाधिक प्राचीन अनादि जैन धर्म के इतिहास को दबाया जा रहा है। आज विद्यालयों, विश्वविद्यालयों में जैन धर्म को मात्र 2650 पूर्व का ही बताया जा रहा है। यह पक्षपात्त जैनों के साथ किया जा रहा है और जैन समाज चुपचाप बैठकर देख रही है। विचार तो करना ही होगा।
भारतदेश के नागरिकों से में यही कहंगा धर्म वह होता है जो सबको गले लगाये, सच्चा धर्म कभी दूसरों का अस्तित्व मिटाकर अपना वर्चस्व बनाने की शिक्षा नहीं देता, सच्चा धर्म सर्व हित, सर्व कल्याण की बात सिखाता है। जैन धर्म ने कभी किसी पर अपना हक नहीं जताया किन्तु जैन धर्म के साथ यह पक्षपात, जैन इतिहासों को दबाने की साजिशें भारतीय संस्कृति के खिलाफ है
प्रत्येक भारतीय नागरिक को सर्व प्राचीन जैन धर्म की संस्कृति रक्षा के लिए अपनी आवाज को बुलंद करना चाहिए !
जैन धर्म सबको गले लगाता है, जैन संस्कृति की रक्षा में प्रत्येक भारतीय को आगे आना होगा – भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज

