इंदौर- राज्यसभा सांसद डांगी ने सदन पटल में उठाया मुद्दा, जैन मंदिरों को बताया अद्वितीय स्थापत्य कला राज्यसभा सांसद नीराज डांगी ने देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की पुर ज़ोर मांग की है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मंगलवार (3 फरवरी 2026) को यह मुद्दा उठाया। इस दौरान सांसद डांगी ने कहा कि राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर स्थित में मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्पकला और जैन सांस्कृतिक उत्कृष्टत के अनुपम उदाहरण हैं।
11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था निर्माण-कांग्रेस नेता व राज्य सभा सदस्य डांगी ने सदन को देलवाड़ा जैन मंदिरों धरोहर के प्राचीन इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि इनका निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य हुआ था। यहां 5 जैन मंदिर हैं, जिनमें ‘विमलसहि’ और ‘लूणवस विशेष रूप से कलात्मक और विशिष्ट है। अन्य प्रमुख मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, पीतलहर मंदिर और पार्शवनाथ मंदिर शामिल है।हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते है मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार, वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों और 1200 श्रमिकों ने 14 वर्षों के अधक प्रयासों से इन मंदिरों का निर्माण किया था। श्वेत संगमरमर से निर्मित इन मंदिरों पर 18.53 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इनकी छतों, गुंबदों और तोरणद्वारों पर की गई अलंकृत नक्काशी और नाया शिल्पकला हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैन संस्कृति के जैन तीर्थकरों की 57 देहरियों में है मूर्तियां स्थापित हैं डांगी ने बताया कि इनमें प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती,लक्ष्मीजी, अंबाजी के साथ नृसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिया दमन और शेषनाग की शैव्या की मूर्तियां भी शामिल हैं। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के साथ-साथ उस युग की लोक संस्कृति, नृत्य-नाट्य कला के अद्भुत और चित्ताकर्षक शिल्प-चित्र भी अंकित हैं।
सांसद डांगी ने शिल्प सौंदर्य की सूक्ष्मता, कोमलता और अलंकरण की विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गुंबदों की छतों पर स्फटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहराबों का बारीक अलंकरण और शिलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु, पक्षियों, वृक्षों, लताओं तथा पुष्पों की आकृतियां पर्यटकों अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यहां की वास्तुकला और शिल्प कौशल अद्वितीय हैं, जिसकी मिसाल विश्व में कहीं नहीं मिलती।साहित्यकार डॉ दिलीप धींग ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा देलवाड़ा मंदिर पर 14 अक्टूबर 2009 को बहुरंगी स्मारक डाक टिकट पाँच रुपए के मूल्य वर्ग का सरकार द्वारा जारी हुआ है। विश्व जैन संगठन जिन शासन एकता संघ के राजेश जैन दद्दू मंयक एवं समग्र जैन समाज के वरिष्ठ जन महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल डॉ जैनेन्द्र जैन हंसमुख गांधी टीके वेद एवं फेडरेशन की शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल ने सांसद सदस्य डांगी के इस प्रयास का स्वागत करते हुए उन्हें जैन समाज की और से धन्यवाद ज्ञापित किया।
देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित करने मांग

