इटावा सफारी पार्क में शीतकाल को देखते हुए वन्यजीवों के लिए विशेष इंतज़ाम

इटावा-शीतकाल के दौरान इटावा सफारी पार्क का तापमान शहर की तुलना में अधिक नीचे गिर जाता है, जिससे यहां ठंड का प्रभाव अधिक महसूस किया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए सफारी प्रशासन द्वारा पार्क में निवास कर रहे वन्यजीवों को ठंड से बचाने के लिए व्यापक और विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
सफारी पार्क में शेर, तेंदुआ एवं भालू के रात्रि विश्राम कक्षों में हीटर व ब्लोअर लगाए गए हैं। साथ ही सभी खिड़कियों को समुचित रूप से बंद किया गया है। जानवरों के लिए पुआल बिछाया गया है, लकड़ी के तख्त उपलब्ध कराए गए हैं तथा भोजन की मात्रा भी बढ़ाई गई है। प्रत्येक एनिमल हाउस का तापमान नियमित रूप से रिकॉर्ड किया जा रहा है और आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त इंतज़ाम किए जा रहे हैं।
शाकाहारी वन्यजीवों के लिए शेल्टर में फूस की टटिया लगाई गई है। झाड़ियों व पेड़ों के नीचे पुआल डाला गया है तथा चारे और हरी पत्तियों की मात्रा बढ़ाई गई है। इन सभी व्यवस्थाओं के माध्यम से सफारी प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि सभी वन्यजीव इटावा की कड़ाके की ठंड से सुरक्षित रह सकें।
इसी क्रम में, नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान, लखनऊ से लगभग डेढ़ माह पूर्व लाए गए पाँच बारासिंघों को डियर सफारी के एनिमल हाउस में तैयार किए गए विशेष क्वारंटाइन एनक्लोजर में रखा गया था। स्वास्थ्य एवं व्यवहार की निरंतर निगरानी के बाद क्वारंटाइन अवधि पूर्ण होने पर सभी बारासिंघों को सफलतापूर्वक सफारी क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
हालांकि, इनमें से नर बारासिंघा सामान्यतः अन्य हिरणों से अलग-थलग रहते देखे जा रहे थे। अन्य प्रजातियों के हिरणों के साथ उनका हर्डलिंग (झुंड में रहने का व्यवहार) नहीं हो पाया। दो नर बारासिंघों के बीच आपसी द्वंद भी समय-समय पर देखने को मिला, जिसके कारण वे चारा खाने के लिए भी कम आते थे। वन्यजीवों में हर्डलिंग से शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है।
मशहूर जीव विज्ञानी डॉ. चार्ल्स डार्विन के सिद्धांत “जीवन संघर्ष की लड़ाई में वही जीव जीवित रहता है जो सबसे फिट होता है” के अनुसार, ये दोनों नर बारासिंघा आपसी संघर्ष और झुंड से अलग रहने के कारण स्वयं को अनुकूल परिस्थितियों के अनुरूप ढाल नहीं पाए, परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई।इसके अतिरिक्त, अत्यधिक ठंड एवं वृद्धावस्था के कारण एक वृद्ध काले हिरण की भी आज मृत्यु हो गई। मृत पशुओं का पोस्टमार्टम पशुचिकित्सकों के पैनल द्वारा कराया गया है। सफारी प्रशासन द्वारा अन्य सभी वन्यजीवों की निरंतर निगरानी की जा रही है।

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