बचपन में बच्चों को दिए गए धर्म के संस्कार और धर्म की शिक्षा उन्हें जीवन भर धर्म से जोड़े रखेगी

इंदौर।
दिगंबर जैन तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में चल रहे ग्रीष्मकालीन जैन धर्म शिक्षण शिविर में बच्चे जहां देव दर्शन, प्रक्षाल,अभिषेक, शांति धारा और अष्ट द्रव्य से पूजन करना सीख रहे हैं वहीं उन्हें जैन धर्म की शिक्षा (प्रथम भाग),जैनत्व के संस्कार,24 तीर्थंकरों के नाम एवं उनकी पहचान के चिन्ह भी याद कराए जा रहे हैं।
प्रतिदिन प्रातः 7:30 से 9: बजे तक सांगानेर से पधारे युवा विद्वान सौरभ शास्त्री एवं सृजन शास्त्री शिविर में सम्मिलित 5 वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चों को सरल भाषा में प्रशिक्षण दे रहे हैं। आज उन्होंने कहा कि शिविर के माध्यम से बचपन में बच्चों को दी जा रही धर्म की शिक्षा और संस्कार उन्हें जीवन भर धर्म से जोड़े रखेंगे।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि संध्या 7 से 9 बजे तक महिलाओं के लिए भी शिक्षण शिविर लग रहा है जिसमें वरिष्ठ युवा विद्वान भरत शास्त्री आचार्य देवसेन विरचित ग्रंथ आलाप पद्धति का स्वाध्याय करा रहे हैं। आलाप पद्धति ग्रंथ संस्कृत गद्य में रचित ग्रंथ है इसमें गुण, पर्याय, स्वभाव, प्रमाण, नय,
प्रमाण का कथन आदि
जैनधर्म की व्यवहारिक शिक्षा का वर्णन है। स्वाध्याय का शुभारंभ करते हुए भरत शास्त्री ने कहा कि आलाप पद्धति अर्थात अपेक्षा कृत कथन करने की अथवा बोलचाल की रीति है। आलाप पद्धति व्यवहार को भी सुधारती है। जैन धर्म के आध्यात्मिक पक्ष एवं उसके स्वरूप को समझने की दृष्टि से आलाप पद्धति ग्रंथ का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है।
शिविर में छत्रपति नगर महावीर बाग अग्रसेन नगर और गौरव नगर में सक्रिय समस्त महिला मंडल की महिलाएं भाग ले रही हैं और इनमें प्रमुख हैं श्रीमती मुक्ता जैन शुभ्रा जैन, मनीषा जैन, रजनी जैन, मीना जैन, सोनाली बागढीया वैशाली जैन, सुनीता जैन और अंजलि जैन,। महिला मंडल की ओर से बच्चों को प्रतिदिन स्वल्पाहार भी कराया जा रहा है एवं गिफ्ट भी प्रदान की जा रही है।

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