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आस्था के नाम पर बेजुबानों की हत्या बंद हो : राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने पशुबलि पर पूर्ण प्रतिबंध की उठाई मांग

इंदौर, 11 अक्टूबर। नवरात्रि पर्व पर देवी मंदिरों के सामने बेजुबान पशु-पक्षियों की दी जा रही बलि पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने कड़ा विरोध जताते हुए इस अमानवीय प्रथा को तत्काल और पूरी तरह बंद करने की मांग की है।

संघ के राष्ट्रीय प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा – “सभी धर्मों में पशु हत्या को पाप और अनुचित माना गया है। आस्था के नाम पर खुले में बकरों-मुर्गों की बलि से न केवल जीव हिंसा होती है, बल्कि गंदगी, प्रदूषण फैलता है और गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ता है। धर्म कभी हिंसा नहीं सिखाता, धर्म तो दया सिखाता है।”

राष्ट्रीय जिन शासन संघ ने रखी ये 5 प्रमुख मांगें –

1. मंदिर परिसर में पशुबलि पर पूर्ण प्रतिबंध: अनेक स्थानों पर मंदिर परिसर के अंदर और बाहर दी जाने वाली बलि प्रथा को तत्काल बंद किया जाए।

2. कठोर कानून और सख्त पालन: आस्था के नाम पर होने वाली पशुहत्या को रोकने के लिए कठोर केंद्रीय कानून बनाया जाए और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का सख्ती से पालन कराया जाए।

3. प्रशासनिक समिति का गठन: पशुबलि रोकने के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और पशु चिकित्सा विभाग की विशेष निगरानी समिति बने।

4. जनजागृति अभियान: अहिंसा में विश्वास रखने वाले सभी समाज बंधुओं द्वारा गांव-गांव में जीव दया और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार किया जाए।

5. न्यायालय के निर्देशों का पालन: पशुबलि रोकने संबंधी माननीय उच्च न्यायालयों के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो।
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रमुख राकेश गोहिल और मयंक जैन ने कहा – कि मन्नत और मनोकामना के नाम पर बेजुबानों की जान लेना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए सभी जीवों के प्रति दया, करुणा और संवेदनशीलता दिखाना ही सच्ची मानवता है।
इस संबंध में समाजसेवी डॉ. कल्याण गंगवाल द्वारा मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार तथा न्यायाधीशों को पत्र भेजकर उचित कार्रवाई की मांग की गई है तथा न्यायालय में याचिका का भी उल्लेख किया गया है।

8 राज्यों में पहले से प्रतिबंधित है पशुबलि –
संघ ने बताया कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी में पशुबलि पर कानूनी प्रतिबंध लागू है। इसके अलावा हरियाणा, त्रिपुरा, असम और उत्तराखंड में उच्च न्यायालयों ने मंदिरों के बाहर पशुबलि पर रोक लगाई है। इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी प्रशासन को ठोस पहल करनी चाहिए।

अंत में राजेश जैन दद्दू ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के “जियो और जीने दो” के अमर संदेश को जन-जन तक पहुँचाकर जीव हिंसा रोकने का हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। इसके लिए सर्व समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा।

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