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पानकुंवर इंटरनेशनल स्कूल में भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुति, विद्यार्थियों ने जाना भारतीय संस्कृति का गौरव

इटावा- पानकुंवर इंटरनेशनल स्कूल में SPIC MACAY उत्तर प्रदेश एवं इटावा चैप्टर के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की उपस्थिति में ‘सात्विक वीणा’ वादन का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में तंत्री सम्राट पंडित सलिल विश्व मोहन भट्ट ने अपने वीणा वादन से श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की अद्भुत परंपरा से परिचित कराया। उनके साथ ख्यातिलब्ध तबला वादक पंडित हिमांशु महंत ने अपनी शानदार संगत से कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।कार्यक्रम में के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति, संगीत और कलाओं के महत्त्व को समझने तथा अपने जीवन में अनुशासन, संस्कार और रचनात्मकता को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, मानसिक एकाग्रता और भारतीय विरासत के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम के मुख्य कलाकार तंत्री सम्राट पंडित सलिल विश्व मोहन भट्ट सात्विक वीणा के सृजन और भारतीय शास्त्रीय संगीत की विशिष्ट परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए विख्यात हैं। उन्होंने अपने विशिष्ट वादन, मधुर स्वरों और भावपूर्ण संगीत के माध्यम से भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत का मनोहारी परिचय दिया। उनके संगीत में भारतीय शास्त्रीय परंपरा के साथ नवीन प्रयोगों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।पंडित सलिल भट्ट को देश-विदेश में अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके परिचय के अनुसार, उन्हें प्रसार भारती एवं आकाशवाणी द्वारा टॉप ग्रेड कलाकार का दर्जा प्राप्त है। उन्हें प्री-ग्रैमी पुरस्कार नामांकन सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। वे भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने वाले प्रमुख कलाकारों में शामिल हैं।प्रख्यात तबला वादक पंडित हिमांशु महंत ने अपनी लयकारी, ताल की जटिल संरचनाओं पर पकड़ और अद्भुत संगत से प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया। उन्होंने बनारस घराने की पारंपरिक तबला शैली का प्रशिक्षण अपने पिता पंडित बालकृष्ण महंत तथा महान तबला वादक पंडित किशन महाराज से प्राप्त किया।पंडित हिमांशु महंत देश-विदेश के प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। उनके प्रमुख कार्यक्रमों में सप्तक संगीत समारोह, बाबा हरिवल्लभ संगीत समारोह, लर्नक्वेस्ट म्यूजिक फेस्टिवल (बोस्टन, अमेरिका) तथा सिडनी संगीत समारोह शामिल हैं। उन्हें वर्ष 2015 में संगीत नाटक अकादमी, भारत सरकार द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे प्रख्यात कलाकारों के साथ नियमित रूप से तबला संगत करते हैं और भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कैलाश चंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर संस्कार, संवेदनशीलता, अनुशासन और रचनात्मक सोच का विकास करना भी है। भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है, जो विद्यार्थियों में धैर्य, एकाग्रता, सौंदर्यबोध और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करता है।उन्होंने कहा कि SPIC MACAY जैसे सांस्कृतिक आंदोलन विद्यार्थियों को देश के महान कलाकारों से सीधे जुड़ने और भारतीय कला एवं संस्कृति को निकट से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं के प्रति गौरव की भावना भी जागृत करते हैं। विद्यालय भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं उपस्थित अतिथियों ने कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लिया। सात्विक वीणा के मधुर स्वरों और तबले की मनमोहक लय ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए भारतीय शास्त्रीय संगीत को समझने, महान कलाकारों की साधना से प्रेरणा लेने और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानने का यादगार अवसर बना।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारतीय संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की अमूल्य धरोहर है

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