इंदौर। जैन धर्म के इतिहास में आज का दिन इंदौर के लिए स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। आज जब चातुर्मास स्थल छत्रपति नगर, दलाल बाग इंदौर में एक ऐसा दुर्लभ, अद्भुत और हृदय को भाव-विभोर कर देने वाला दृश्य उपस्थित हुआ, जिसे देखकर हर श्रावक की आँखें नम हो गईं और हृदय भक्ति से भर उठा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि जगत्पूज्य 108 सुधा सागर जी महामुनिराज और आचार्य श्री 108 विशुद्ध रत्न मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज की आहार चर्या एक ही चौके में एक साथ संपन्न हुई।
यह संयोग अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। दो महान दिगंबर महामुनिराजो का एक ही श्रावक के घर, एक ही चौके में, एक साथ आहार ग्रहण करना इसे शास्त्रों में परम सौभाग्य का प्रतीक माना गया है।
वात्सल्य की गंगा बही –
आहार के पश्चात मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने भाव-विभोर होते हुए कहा – “आज जगत्पूज्य मुनि श्री सुधा सागर जी महामुनिराज के चरणों में जो प्रेम, जो वात्सल्य मिला है, उसे जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता। यह मेरे मुनि जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।”
सुधा सागर जी महाराज ने विशुद्ध रत्न मुनिराज साध्य सागर जी को जिस ममता और वात्सल्य से आशीर्वाद दिया, वह दृश्य वहाँ उपस्थित सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। बड़े मुनिराज का छोटे मुनिराज के प्रति यह वात्सल्य, यही तो जैन धर्म की गुरु-शिष्य परंपरा की आत्मा है।
चातुर्मास स्थल छत्रपति नगर में सुबह से ही हजारों भक्तों का तांता लगा हुआ था। जैसे ही यह समाचार फैला कि दोनों मुनिराजों का आहार एक ही चौके में हो रहा है, पूरा पंडाल “वंदे विद्या विशुद्ध सागरम्” नमोस्तु शासन जयवंत के जयकारों से गूंज उठा।
चौका लगाने वाले पुण्यशाली श्रावक परिवार के तो भाग्य ही खुल गए। एक साथ दो महामुनियों को आहार देने का पुण्य शायद ही किसी को मिलता है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर समाज के वरिष्ठजन, डॉ जैनेन्द्र जैन, भुपेंद्र जैन श्रुत जैन अरविंद सोधीया एवं श्रीमती मुक्ता जैन,सौनाली बागड़ियां, साधना जैन आदि महिला मंडल, युवा मंडल और सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सभी ने इस अद्भुत क्षण के साक्षी बनकर अपने आप को धन्य माना।
।। वंदे विद्या विशुद्ध सागरम् ।।
।। जय जय सुधा सागर, जय जय साध्य सागर ।।
– रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ, इंदौर

