Top Newsमध्य प्रदेश

आपको नोट की जितनी चिंता है क्‍या अपने परिवार की है – विमर्श सागर

भिण्‍ड/ मनुष्‍य जीवन में सबसे बड़ी दौलत क्‍या है? मनुष्‍य जीवन में सबसे बड़ा धन-वैभव होता है? मनुष्‍य जीवन की सबसे बड़ी दौलत है – परिवार। परिवार है तो आपकी धन-दौलत-वैभव का महत्‍व है। यदि परिवार सुख शांति में है तो आप भी चैन से जी पायेंगे। परिवार प्रसन्‍न है तो आपका मन प्रसन्‍न है, परिवार खेदखिन्‍न है तो मन को सुकून नहीं मिलता। यह मंगल उद्बोधन भिण्‍ड नगर के परेड जैन मंदिर पुस्‍तक बाजार में आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुये कहा।
आचार्य श्री ने आगे कहा- अपने जीवन में इन तीन चीजों को हमेशा साथ लेकर चलना चाहिए परिवार, समाज और धर्म। सबसे पहिले परिवार होता है, परिवार में सबसे बडी चुम्‍बकीय शक्ति आत्‍मीयता होती है। परिवार में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। आज यदि आपके परिवार में कोई वृद्ध हो जाए तो आप उनकी कोई कद्र नहीं करते किन्‍तु आपके पास 2000 रूपये के दो नोट है एक नया है और दूसरा घिसा हुआ है आप ही बताइए आप उन दोनों नोटों में से किस नोट की कीमत कम मानेंगे। आपको दोनों ही नोटों की कीमत बराबर मालूम पड़ती है किनतु आप अपने परिवार में अपने बुजुर्गजनों की कद्र नहीं कर पाते। आपके हाथ में पॉंच अँगुलियॉं हैं, आपको कौन सी अंगुली अधिक उपयोगी लगती है। जिस प्रकार आप अपनी किसी अंगुली को खोना नहीं चाहते, पॉचों ही अंगुलियों से आपका सम्‍पूर्ण हाथ कहलाता है उसी प्रकार परिवार के सभी सदस्‍यों से आपके परिवार की पूर्णता होती है। 100 रूपये के दो नोट मिलकर 200 रूपये हो जाते हैं आप भी परिवार के सभी सदस्‍य मिलकर अपने परिवार की प्रतिष्‍ठा बनाकर रखें। वर्तमान समय में व्‍यक्ति अपने व्‍यवहार में कंजूसी रखता है किन्‍तु दूसरों से अपने प्रति हमेशा अच्‍छे व्‍यवहार की आशा करता है।
आज घर परिवार में आप अपने परिवार सदस्‍यों को हमेशा उलाहना देते रहते हैं कि देख ‘पडोस का बेटा कितना होशियार है और तुम कुछ भी लायक नहीं हो’ ऐसे उलाहने देने से उनमें हीन भावना ही जन्‍म लेती है और वे आगे कुछ भी करने में बाध्‍य हो जाते हैं। आप उसे अपराधी की दृष्टि से देखते हैं तो आपका घर एक जेलखाने से ज्‍यादा कुछ नहीं कहलाता। यदि आप घर के प्रत्‍येक सदस्‍य को मंदिर में बैठी प्रतिमा की तरह देखोगे तो आपका घर निश्चित ही मंदिर-सवर्ग बन जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Close