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भारतीय संस्कृति त्याग और बलिदान की संस्कृति है – प्रतीक सागर महाराज

भिण्‍ड/ भारतीय संस्कृति त्याग और बलिदान की संस्कृति है जहां केवल इंसान को जीने का अधिकार नहीं दिया जाता है बलिक मानव जाति को अपना परिवार माना जाता है इसलिए महावीर तीर्थंकर ने विश्व मैत्री के ऊपर सबसे अधिक जोर दिया है विश्व एक परिवार है यहां सभी को जीने का अधिकार है मध्य प्रदेश शासन के राजकीय अतिथि क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने खंडा रोड पर विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संतों को सपोर्ट, चेक देकर के नहीं बांधा जा सकता है संतो तो केवल भक्तों की श्रद्धा भक्ति में बंधे होते हैं श्रद्धा का फूल केवल भक्त के मन में खिला होता है जिसके ऊपर प्रभु और गुरु का वास होता है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि जो समाज संगठित होता है उसका भविष्य होता है मगर जो खंड-खंड में बिक जाता है समाज का भविष्य भी अंधकार में डूब जाता है हमें अपनी जय-जयकार नहीं बल्कि धर्म की जय-जयकार करानी चाहिए। चेतावनी देते हुए मुनि श्री ने कहा कि अगर हम धर्म की प्रभावना न कर सकें तो ऐसी क्रिया और आचरण भी ना करें जिसमें धर्म की अप्रभावना हो यही तुम्‍हारे द्वारा किया जाने वाली क्रिया सबसे बड़ी धर्म की प्रभावना होगी।
आग लगाने वाले दुनिया में कम नहीं है मगर जरूरत बाग लगाने वालों की है संपत्ति और सत्ता 4 दिनों में समाप्त हो जाएगी लेकिन तुम्हारे संस्कार और सदाचरण तुम्हें मरने के बाद भी अमर करके जाएगे। जिन्होंने अमृत पिया उन्हें दुनिया अमर कहती है मगर सही मायने में अमर तो वही है जो पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं या लिखने लायक कुछ कर जाते है।
धर्म सभा के शुभारंभ में मुनि श्री मुनि श्री के गुरुवर गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण समाज श्रेष्ठ द्वारा किया गया। इस अवसर पर गुरु भक्तों को मुनि श्री के पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
प्रेस को जानकारी में मनोज जैन ने बताया कि मुनि श्री का प्रवास नसिया जी में है जहां पर 28 नवंबर को प्रातः 8:30 बजे से 10:15 बजे तक विराट धर्म सभा का आयोजन होगा, दोपहर में सामूहिक स्वाध्याय एवं शाम को आनंद यात्रा का आयोजन किया जाएगा।

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