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बुंदेलखंड की सांस्कृतिक परंपरा है गौर, सुआटा (टेसू) पर्व

दतिया। बुंदेलखंड में लोकगीत, लोक पर्व, लोक पारंपरिक विधाएँ गहरे तक रची बसी हैं। ऐसा ही एक लोक पर्व है गौर विसर्जन। गौर विसर्जन व सुआटा विसर्जन में बुंदेलखंड की बालिकाएं एक मिट्टी की गौर बनाकर उसे चावल और चने की दाल से सजाते हैं।नौवीं के दिन सुआटा व गौर को विसर्जन के लिए नदी या तालाब में ले जाते हुए सामूहिक गीत गाती और हंसी ठिठोली करती जाती हैं। इस परंपरा को आज भी जीवित रख रही हैं मध्य प्रदेश के दतिया जिले के ग्राम सेंमई की बालमंच की बालिकाएं। बालमंच की अध्यक्ष कु. ब्रिजकुँवर पाँचाल का कहना है कि हमें अपनी लोक परंपराऐ नहीं भूलनी चाहिए। यह परंपराऐ हमें एक साथ रहने की सीख देती हैं और एकजुटता का पाठ पढ़ाती हैं। यह लोक पर्व अश्विन माह के पूरे महीने चलता है पूर्णिमा के दिन से मामूलिया (साँझी)15 दिन तक चलता है।प्रतिपदा से सुआटा बनाया जाता है और सूर्य की पहली किरण के साथ बालिकाएं गीत गाती है।नवमी के दिन गौर व सुआटा विसर्जन की रीति के हिसाब से उसे सजा कर गीत गाकर बालिकाएं विसर्जन करने जाती

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