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नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री कार्यकाल के बीच में ही कुर्सी छीनने का हुआ डर, पूर्व मुख्यमंत्री का नाम लेकर जाहिर किया शक

राजनीति में किस नेता के साथ कब और कौन-सा नेता या पार्टी राजनीति कर दे, कोई नहीं जानता है। बीजेपी के सहयोग से सत्ता का सुख भोग रहे बिहार के मुख्यमंत्री को अब अपनी कुर्सी छीनने का डर सताने लगा है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की जयंती के दौरान रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में यह बात कही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बात का भय है कि इस कार्यकाल के बीच में ही उन्हें सीएम की कुर्सी से हटाया जा सकता है। रविवार को पटना में जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती के मौके पर जदयू ऑफिस में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश ने छिपे हुए शब्दों में कुछ ऐसा ही कहा। नीतीश कुमार ने कहा कि ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर के साथ अन्याय क्यों हुआ? कर्पूरी ठाकुर जी ने अतिपिछड़ों को आरक्षण दिया। नाराज लोगों ने 2 साल कुछ महीने में ही उन्हें हटा दिया। हमलोग भी सबके हित में काम कर रहे हैं। कभी-कभी सबके हित में काम करने से कुछ लोग नाराज हो जाते हैं। किसी की भी हमने उपेक्षा नहीं की है। बिहार निरंतर आगे बढ़ रहा है।’

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर (फाइल फोटो)

बता दें कि बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए कर्पूरी ठाकुर बिहार की राजनीति में शिखर तक पहुंचे और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री भी बने। पहली बार 22 दिसंबर, 1970 को उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और 2 जून, 1971 को पद से इस्तीफा दे दिया था। दूसरी बार वे 24 जून, 1977 को राज्य का मुख्यमंत्री बने और मजबूरन 21 अप्रैल, 1979 को पद से इस्तीफा देना पड़ा। वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के दूसरे कार्यकाल की तरफ ही इशारा करते हुए अपने डर को सबके सामने रखा।

अपनी बातों को जयंती समारोह तक सीमित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों को जमीन पर उतारने के लिए हम प्रयत्नशील हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, लोकनायक जय प्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, जननायक कर्पूरी ठाकुर के विचारों से हमलोग प्रेरित होकर काम कर रहे हैं। हम लोगों ने न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर काम करते हुए हर इलाके और हर तबके का विकास किया है। पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिससे समाज के हर तबके की महिलाएं जनप्रतिनिधि के तौर पर जनसेवाओं से जुड़ीं। अतिपिछड़ों को अनुसूचित जाति, जनजाति की तरह ही उद्योग लगाने, शिक्षा प्राप्त करने एवं अन्य कई क्षेत्रों में सुविधाएं दी जा रही हैं।

विपक्ष पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे कहा कि ‘कुछ लोग सिर्फ सत्ता का सुख लेना चाहते हैं। हमारे लिए सत्ता का बस एक मतलब है और वो है सेवा। लोगों की सेवा करना ही हमारा धर्म है। मैं वचन देता हूं, जब तक हम हैं, लोगों की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जो भी नीतियां बनाईं उसका लाभ सबको मिला है। सरकार में आने के पहले ही दिन से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक समाज, अतिपिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए गए हैं।’

जब कर्पूरी ठाकुर बिहार के मुख्यमंत्री थे तब समस्तीपुर में जी कृष्णन डीएम होकर गए थे। वह निरीक्षण के लिए कर्पूरी ठाकुर के पैतृक गांव के समीप से गुजर रहे थे। तब खेत में बकरी के साथ खड़ी एक महिला को उन्होंने देखा। साथ चल रहे अंचलाधिकारी ने बताया कि वह महिला कर्पूरी ठाकुर की धर्मपत्नी हैं। ये सुनते ही डीएम झल्ला गए। उन्होंने कहा कि मैं नया हूं इसलिए तुम मुझे उल्टा-पुल्टा बता रहे हो। अंचलाधिकारी ने कहा कि मैं सही बोल रहा हूं सर। डीएम ने कहा कि अगर तुम्हारी बात गलत निकली तो मैं तुम्हें निलंबित कर दूंगा, तब कृष्णन ने खुद जाकर पास के लोगों से पूछा तो बात सही निकली।

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