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संसद कैंटीन में भोजन पर मिलने वाली सब्सिडी हुई बंद, केंद्र सरकार को सालाना करोड़ों रूपए की होगी बचत

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को जानकारी दी कि भारतीय संसद की कैंटीन में सांसदों, अन्य को खाने पर दी जाने वाली सब्सिडी बंद कर दी गई है। बिरला ने इससे जुड़े वित्तीय पहलुओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। हालांकि सूत्रों ने बताया कि सब्सिडी समाप्त किए जाने से लोकसभा सचिवालय को सालाना 8 करोड़ रूपये की बचत हो सकेगी।लोकसभा अध्यक्ष ने बजट सत्र की तैयारियों के बारे में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि उत्तर रेलवे के बजाय अब आईटीडीसी संसद की कैंटीनों का संचालन करेगा।

संसद कैंटीन में सब्सिडी मिलने के दौरान जारी रेट लिस्ट (फाइल फोटो)

निम्न सदन के अध्यक्ष ने आगे कहा कि संसद सत्र शुरू होने से पहले सभी सांसदों से कोविड-19 जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा। बिरला ने कहा कि सांसदों के आवास के निकट भी उनके आरटी-पीसीआर कोविड-19 परीक्षण किए जाने की व्यवस्था की गई है।

लोकसभा स्पीकर ने कहा कि केंद्र, राज्यों द्वारा निर्धारित की गई टीकाकरण अभियान नीति सांसदों पर भी लागू होगी। उन्होंने कहा कि संसद परिसर में 27-28 जनवरी को आरटी-पीसीआर जांच की जाएगी, सांसदों के परिवार, कर्मचारियों की आरटी-पीसीआर जांच के भी प्रबंध किए गए हैं। बिरला ने कहा कि 29 जनवरी से शुरू होने वाले संसद सत्र के दौरान राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगी और लोकसभा की कार्यवाही शाम 4 से रात 8 बजे तक होगी। उन्होंने कहा कि संसद सत्र के दौरान पूर्व निर्धारित एक घंटे के प्रश्नकाल की अनुमति रहेगी।

जानकारी के मुताबिक संसद कैंटीन की रेट लिस्ट में चिकन करी 50 रुपए में तो वहीं वेज थाली 35 रुपए में परोसी जाती है। वहीं थ्री कोर्स लंच की कीमत 106 रुपए निर्धारित है। संसद कैंटीन में साउथ इंडियन फूड की बात की जाए तो संसद में प्लेन डोसा मात्र 12 रुपए में मिलता है। उल्लेखनीय है कि एक आरटीआई के जवाब में 2017-18 में यह रेट लिस्ट सामने आई थी। 2019 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान बिरला ने इसके लिए एक सुझाव दिया था और सांसदों ने सर्वसम्मति से संसद की कैंटीन में किसी भी तरह की सब्सिडी का लाभ नहीं उठाने का फैसला किया था।

बता दें कि संसद की कैंटीन के सस्ते खाने का लुत्फ सांसद और उनके मेहमान, पूर्व सांसद, संसदीय परिसर के अधिकारी- अन्य स्टाफ और वैध पास वाले आगंतुक ही उठाते रहे हैं। आम आदमी को इस सस्ते खाने की सुविधा हासिल नहीं है। वित्त वर्ष 2015-16 में कुल 15.97 करोड़ रुपए सब्सिडी दी गई। अगले वित्त वर्ष 2016-17 में जब संसद की कैंटीन को 15.40 करोड़ रुपए सब्सिडी दी गई। ये सब्सिडी इससे पहले के वित्त वर्ष 2015-16 की तुलना में महज 57 लाख रुपए ही कम रही।

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