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सुप्रीम कोर्ट ने नए कृषि कानूनों पर लगाई रोक, कमेटी गठित करने पर आंदोलन कर रहे किसान असमंजस में

मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान लगातार अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं और केंद्र सरकार द्वारा बार-बार चर्चा के लिए बुलाए गए प्रतिनिधियों के बीच भी कृषि मंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्री ठोस समाधान निकालने में अब तक असमर्थ रहे। मंगलवार को किसान आंदोलन को लेकर बड़ी खबर आ रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए कृषि कानून पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। बता दें कि नए कृषि कानूनों और किसानों के प्रदर्शन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने किसानों से बातचीत के लिए एक कमेटी का गठन भी किया है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि किसानों की चिंताओं को कमेटी के सामने रखे जाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में किसानों की ओर से वकील एमएल शर्मा ने कहा कि किसान कमेटी के पक्ष में नहीं हैं और हम कानूनों की वापसी ही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन बेच दी जाएंगी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने वकील से पूछा कि ये कौन कह रहा है कि जमीन बिक जाएंगी? इस पर एमएल शर्मा ने कहा कि अगर हम कंपनी के साथ अनुबंध करेंगे और फसल क्वालिटी अच्छी नहीं हुई तो कंपनी उनसे भरपाई मांगेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि किसानों की चिंताओं को कमेटी के सामने रखे जाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में किसानों की ओर से वकील एमएल शर्मा ने कहा कि किसान कमेटी के पक्ष में नहीं हैं और हम कानूनों की वापसी ही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन बेच दी जाएंगी। इस पर CJI ने कहा कि हम अंतरिम आदेश में कहेंगे कि ज़मीन को लेकर कोई कांट्रेक्ट नहीं होगा।

चीफ जस्टिस ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि किसान कमेटी के पास जाएं, हम इस मुद्दे का हल चाहते हैं और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन से हल नहीं निकलेगा।’ उन्होंने कहा, ‘कोई भी हमें कमेटी बनाने से नहीं रोक सकता है। जो कमेटी बनेगी, वो हमें रिपोर्ट देगी।’

CJI ने कहा कमेटी हम अपने लिए बना रहे है और कमेटी हमें रिपोर्ट देगी। कमेटी के समक्ष कोई भी जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को सुलझाने और किसानों से बाचतीत के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। इस कमेटी में कुल चार लोग शामिल होंगे, जिनमें भारतीय किसान यूनियन के जितेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी और अनिल शेतकारी को शामिल किया गया है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि यह कमिटी सबकी सुनेगा। जिसे भी इस मुद्दे का समाधान चाहिए वह कमिटी के पास जा सकता है। यह कोई आदेश नहीं जारी करेगा या आपको सजा नहीं देगा। यह केवल हमें अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। उन्होंने कहा कि हम एक कमिटी का गठन करते हैं ताकि हमारे पास एक साफ तस्वीर हो। हम यह नहीं सुनना चाहते हैं कि किसान कमिटी के पास नहीं जाएंगे। हम समस्या का समाधान करना चाहते हैं। अगर आप अनिश्चितकाल के लिए प्रदर्शन करना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं।

किसान संगठनों की तरफ पेश वकील एमएल शर्मा ने कहा कि किसानों ने कहा कि कई लोग बातचीत के लिए आए हैं लेकिन मुख्य व्यक्ति प्रधानमंत्री नहीं आए हैं। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम पीएम को बातचीत करने के लिए नहीं कह सकते हैं। वह इस मामले में पार्टी नहीं हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली के सिंघु बॉर्डर सहित अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को 47 दिन पूरे हो गए। किसानों का रुख बेहद साफ है, वे किसी भी हालत में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। किसान अब भी तीनों नए कृषि कानून को वापस कराने पर अड़े हुए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं होता, वे मुड़कर पीछे नहीं देखेंगे। आठवें दौर की बातचीत के समय भी किसानों के इस रुख के कारण सरकार और किसान संगठनों के बीच नोकझोंक की भी बात सामने आई थी।

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