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किसान आंदोलन के दौरान गाजीपुर बॉर्डर पर एक किसान ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में बताई आखिरी इच्छा

केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में किसानों का आंदोलन जारी है। 38 दिनों से अधिक समय से जारी इस किसान आंदोलन में शामिल किसान ठंड, बारिश की परवाह किए बगैर अपनी मांगों को पूरा करवाने की बात पर अड़े हुए हैं। देश की राजधानी नई दिल्ली की सीमा के गाजीपुर बॉर्डर पर एक किसान ने धरनास्थल पर बने एक शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। मृत किसान का नाम कश्मीर सिंह है जो कि यूपी के रामपुर का निवासी बताया जा रहा है। किसान कश्मीर सिंह ने आत्महत्या से पहले एक कथित सूइसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उन्होंने किसान आंदोलन को लेकर एक अपील भी लिखी है।

 

आत्महत्या करने वाले किसान कश्मीर सिंह का जो कथित सूइसाइड नोट बरामद हुआ है, उसमें उन्होंने लिखा है कि उनकी शहादत बेकार ना जाए। कश्मीर सिंह ने यह भी लिखा है कि उनका अंतिम संस्कार दिल्ली यूपी की सीमा पर ही किया जाए। इससे पहले गाजीपुर सीमा पर शुक्रवार को एक किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी। बागपत जिले के भगवानपुर नांगल गांव के निवासी मोहर सिंह (57) को धरनास्थल पर ही दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

डीएसपी, इंदिरापुरम अंशु जैन ने बताया कि मेडिकल जानकारी के अनुसार किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई। इस संबंध में किसान संगठन बीकेयू के प्रदेश अध्यक्ष राजबीर सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जिन किसानों की मृत्यु हो गई, उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने पर दुख जाहिर किया है। राकेश टिकैत का कहना है कि किसान इस आंदोलन से भावनात्मक रूप से जुड़ चुका है। सरकार सुन नहीं रही है। यही कारण है कि इस त्तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार की अगर यही स्थिति रही तो इस सरकार को किसान धरती में मिला देगा।

विदित हो कि देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर स्थित गाजीपुर बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर पर 26 नवंबर 2020 से ही किसान डेरा डाले हुए हैं। ये किसान मोदी सरकार द्वारा पारित तीन नये कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ-साथ न्यनूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। हालांकि सरकार ने उनकी चार प्रमुख मांगों में पराली दहन से संबंधित अध्यादेश के तहत भारी जुर्माना और जेल की सजा के प्रावधान से मुक्त करने और बिजली सब्सिडी से जुड़ी उनकी मांगों को बुधवार को हुई बैठक में मान ली है और अन्य दो मांगों पर किसान संगठनों के नेताओं और सरकार के बीच अगली दौर की वार्ता चार जनवरी को होगी।

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