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नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा- विरोधियों को जेल भेज रही है मोदी सरकार, बीजेपी नेता ने किया पलटवार

देश में किसान आंदोलन को लेकर विपक्ष और कुछ किसान संगठन केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, सत्ताधारी पार्टी के कुछ नेता आंदोलन कर रहे किसानों को आंतकवादी, खालिस्तानी जैसे शब्दों से संबोधित कर रहे हैं। अब नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने एक न्यूज एजेंसी को ई-मेल के जरिए दिए गए इंटरव्यू में दावा किया कि भारत में असहमति की गुंजाइश कम हो गई है। मनमाने तरीके से लोगों को देशद्रोह के आरोप में जेल भेजा जा रहा है। पर सवाल ये है कि क्या ये वाकई सच है या फिर महज विचारधारा की लड़ाई है।

कभी किसानों के नाम पर, कभी CAA और NRC के विरोध में और कभी असहिष्णुता के बहाने देश में एक बड़ा तबका केंद्र सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा करता आया है। इस बार कुछ इसी तरह की बहस को जन्म दिया है अमर्त्य सेन के इंटरव्यू ने। इस इंटरव्यू के जरिए अमर्त्य सेन ने दावा किया कि कोई व्यक्ति जो सरकार को पसंद नहीं आ रहा है। उसे सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित किया जा सकता है और जेल भेजा सकता है। लोगों के प्रदर्शन के कई अवसर और मुक्त चर्चा सीमित कर दी गई है या बंद कर दी गई है। असहमति और चर्चा की गुंजाइश कम होती जा रही है। लोगों पर देशद्रोह का मनमाने तरीके से आरोप लगा कर बगैर मुकदमा चलाए जेल भेजा जा रहा है। अमर्त्य सेन का ये भी कहना है कि कन्हैया कुमार, शेहला राशिद और उमर खालिद जैसे युवाओं के साथ दुश्मन जैसा व्यवहार किया जा रहा है।

कुछ दिन पहले विश्वभारती विश्वविद्यालय ने ममता बनर्जी सरकार को एक चिट्ठी लिखते हुए आरोप लगाया था कि कुछ लोग उनकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए हैं। इस चिट्ठी में अमर्त्य सेन का नाम भी शामिल था। अभी ये विवाद गरमाया हुआ है और इसको लेकर ममता बनर्जी भी बीजेपी पर हमलावर हैं। सवाल ये है कि क्या अमर्त्य की लड़ाई वैचारिक है। जिसमें वो मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह की बातों को हवा दे रहे हैं या फिर ऐसा करके वो अवैध भूखंड को बचाए रखने के लिए ये सब बयानबाजी कर रहे हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की इस टिप्पणी को लेकर पलटवार करते हुए कहा कि उनके आरोप निराधार हैं और उन्हें देश को बदनाम नहीं करना चाहिए। अमर्त्य सेन नामी अर्थशास्त्री हैं लेकिन हम सब उनकी विचारधारा और बीजेपी के प्रति उनके दृष्टिकोण से अवगत हैं। सेन को देश को बदनाम करने से परहेज करना चाहिए।’ सेन ने कहा कि केंद्र के तीनों कृषि कानूनों की समीक्षा करने के लिए वाजिब वजह हैं। उन्होंने कहा, ‘तीनों कानूनों में संशोधित करने के लिए ठोस कारण हैं। लेकिन सबसे पहले चर्चा करनी चाहिए। पेश ऐसे किया गया कि बड़ी छूट दी गई है जबकि असल में थोड़ी ही रियायत दी गई है।’

कृषि कानूनों के संबंध में अमर्त्य सेन की टिप्पणी पर बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार ने मुद्दे के समाधान और किसान संगठनों की चिंताओं को दूर करने के लिए हरसंभव कदम उठाए हैं। सेन ने कहा कि देश में वंचित समुदायों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों को सही से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘कई नीतियों के बावजूद बाल कुपोषण बढ़ता जा रहा है। इससे निपटने के लिए हमें अलग तरह की कई नीतियों की जरूरत है।’

बहरहाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ विचार रखने के लिए बीजेपी द्वारा अमर्त्य सेन को निशाना बनाया जा रहा है। बनर्जी ने कहा, ‘केंद्र सरकार के खिलाफ विचार रखने के लिए सेन को निशाना बनाया जा रहा है। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। राजनीतिक विचार रखने के लिए जिस तरह मुझ पर निशाना साधा जा रहा है, उसी तरह उनपर भी हमले किए जा रहे हैं।’

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