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किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब के वकील ने सुसाइड नोट लिखकर खाया जहर, मौत

केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे देशभर के किसानों को एक महीने से अधिक का समय हो गया है किन्तु मोदी सरकार के साथ कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। कंपकंपाती ठंड और आत्महत्या जैसा कदम उठाने के कारण अब तक 30 से अधिक किसानोें की मौत हो चुकी है। रविवार सुबह बहादुरगढ़ के टिकरी स्थित हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर पंजाब के एक और किसान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के मुताबिक, सुसाइड से पहले वकील ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र भी छोड़ा है। पत्र का कुछ हिस्सा टाइप किया हुआ है जबकि कुछ हिस्सा पेन से लिखा गया है। इस आत्महत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस इस सुसाइड नोट की जांच में जुट गई है।

एडवोकेट अमरजीत किसान आंदोलन में साथी किसानों के साथ (साभार:सोशल मीडिया)

आत्महत्या करने वाले वकील की पहचान फाजिल्का जिले के मंडी लाधूका निवासी अमरजीत सिंह राय के रूप में हुई है। वह किसान होने के साथ-साथ वकील भी थे और जलालाबाद बार एसोसिएशन के सदस्य थे। पिछले एक सप्ताह से वह धरने में शामिल थे। अमरजीत सिंह राय ने रविवार सुबह दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर से करीब 6 किलोमीटर दूर पकौड़ा चौक के पास जगह खा लिया। अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर वकील को रोहतक PGIMS रेफर किया गया, लेकिन वहां उनकी मौत हो गई। इसकी पुष्टि किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सतपाल कंबोज ने की, जो रोहतक अस्पताल में उसके साथ थे।

आत्महत्या करने वाले एडवोकेट अमरजीत द्वारा छोड़ा गया कथित सुसाइड नोट

एडवोकेट अमरजीत ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि प्रधानमंत्री कुछ लोगों के ही बनकर रह गए। तीनों कृषि बिल किसान, मजदूर और आम आदमी का जीवन तबाह कर देंगे। किसानों, मजदूर और आम आदमी की रोजी-रोटी मत छीनो। बताया जा रहा है कि पीड़ित वकील प्रधानमंत्री के नाम यह पत्र पहले से ही टाइप करके लेकर आए थे। हालांकि इस पत्र में हाथ से लिखा है कि न्याय पालिका भी जनता का विश्वास खो चुकी है।

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