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साहिबजादा दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर हुआ गुरुबाणी का आयोजन

12 दिसंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अचानक रविवार सुबह दिल्ली में स्थित गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का दौरा करते हुए देशवासियों को हैरान कर दिया था। उस दिन पीएम मोदी ने अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि दी थी। विदित हो कि 12 दिसंबर को गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस मनाया गया था। आज उत्तर प्रदेश में आम लोगों के साथ एक ही कतार में जमीन पर बैठकर गुरुबाणी सुनते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और सरकार के कई मंत्रियों की तस्वीरें मीडिया में आने के बाद लोग हैरान रह गए। रविवार को 5 कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर ऐसा ही नजारा था। गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादों एवं माता गुजरी की शहादत को समर्पित ‘साहिबजादा दिवस’ का आयोजन किया गया।

 

 

इस असवर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म, संस्कृति एवं स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपने जीवन का बलिदान देने वाले साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चार साहिबजादों एवं माता गुजरी जी की शहादत को समर्पित ‘साहिबजादा दिवस’ पर उन्हें कोटिशः नमन. अत्याचार के विरुद्ध आप सभी का अपूर्व संघर्ष हमारे लिए महान प्रेरणा है। बता दें कि साहिबजादा दिवस के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर गुरुवाणी का पाठ हुआ। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और सिख पंथी शामिल हुए।

साहिबजादा दिवस के उपलक्ष्य में 5 कालिदास मार्ग स्‍थित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर गुरुवाणी का पाठ हुआ। रविवार सुबह 11:30 बजे से प्रस्तावित गुरुवाणी कीर्तन में मुख्यमंत्री सहित सरकार के अन्य मंत्री और गणमान्यजन शामिल हुए। योगी आदित्यनाथ सरकार सबका साथ सबका विकास के राजनीतिक संकल्प और भाव के साथ ही प्रदेश में धार्मिक सद्भाव की ओर भी लगातार कदम बढ़ा रही है।

 

यह दिवस गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्रों अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत की याद में मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि साहिबजादा दिवस की तरह ही इससे पहले गुरुनानक देव के 550वें प्रकाशोत्सव पर मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवाणी कीर्तन व लंगर का आयोजन किया गया था। इसमें योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदेश के कई कैबिनेट मंत्री मौजूद थे। तब सिख समुदाय के 200 से 250 लोगों ने लंगर व प्रसाद ग्रहण किया था।

 

गुरु गोविंद सिंह के दो साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को 26 दिसंबर 1704 को इस्लाम धर्म कबूल न करने पर सरहिंद के नवाब ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया। साहिबजादों की शहादत धर्म को बचाने के लिए प्रार्थना की गई। फतेहगढ़ साहिब में गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों को दीवार में सिर्फ इसलिए चिनवा दिया गया कि उन्होंने अपना धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म नहीं अपनाया। सरहिंद पर वो पुण्य भूमि थी जहां कण-कण से आवाज आती थी कि सिर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं।

नौकर गंगू ने लालच के कारण वजीर खां से मुखबिरी की जिससे उन्हें गिरफ्तार कर ठंडे बुर्ज में रखा गया कि वह इस्लाम धर्म स्वीकार कर लें। पर जीदार बच्चों ने जोर से जयकारा लगा दिया जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल। फिर जब उन्हें सलामी के लिए कहा गया तो भी उन्होंने जबाब दिया कि हम अकाल पुरख और अपने गुरु, पिता के अलावा अन्य किसी के आगे सर नहीं झुकाते। जिससे क्रोधित हो उन्हें जीवित ही दीवार मे चुनना शुरू किया गया। इसके साथ ही साहिबजादों ने जपु जी साहिब का पाठ करना शुरू किया। दीवार पूरी हुई और अंदर से जयकारे की आवाज आयी। दीवार तोड़ी गयी। बच्चे जिंदा थे और मुगलों का कहर बाकी। जबरन साहिबजादों को मार दिया गया। उधर साहिबजादों के शहीद होने की खबर सुन कर माता गुजरी जी ने अकाल पुरख को इस गर्वमयी शहादत के लिए आभार किया और प्राण त्याग दिए।

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