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आर्थिक तंगी से जूझ रही मध्यप्रदेश सरकार करेगी 51 सरकारी कॉलेजों को बंद, राज्य पर बढ़ती जा रही कर्जदारी

कोरोनाकाल में हर कोई आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। आम इंसान से लेकर राज्य और केंद्र सरकार बड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, आर्थिक तंगी से जूझ रही मध्यप्रदेश सरकार अब राज्य के 51 सरकारी कॉलेजों को बंद करने जा रही है। वहीं, जिन कॉलेजों में 80 % विद्यार्थी हैं उन्हें दूसरे कॉलेजों में मर्ज किया जाएगा। खर्चों में कमी लाने का प्रयास करते हुए सरकार ऐसा कर रही है।

आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में फिलहाल 500 से ज्यादा शासकीय कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं। जिनमें हजारों की संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं। प्रदेश में 185 कॉलेज ऐसे हैं, जिनमें 80 % से ज्यादा छात्रों की उपस्थिति है। जबकि 51 कॉलेज ऐसे पाए गए हैं, जिनमें इससे भी कम छात्र हैं, इसलिए सरकार इन कॉलेजों को 80 % उपस्थिति वाले कॉलेजों में मर्ज करेगी।

जानकारी के मुताबिक, आर्थिक तंगी से गुजर रही मध्यप्रदेश सरकार पर बाजार का कुल 2 लाख 11 हजार 89 करोड़ से ज्यादा का कर्ज हो चुका है। साल 2018 के अंत में यह कर्ज 1 लाख 80 हजार करोड़ था। शिवराज सरकार द्वारा हाल में लिए गए 2000 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 16,500 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। इसका असर जनता को बढ़े हुए टैक्स के रूप में चुकाना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश में इस समय पेट्रोल और डीजल पर देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा सबसे ज्यादा टैक्स सरकार की ओर से वसूला जा रहा है।

मध्यप्रदेश में बीजेपी शासित सरकार ने इसी महीने की शुरुआत में 5760 स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया था। ये स्कूल राज्य के 20 जिलों के 89 प्रखंडों में संचालित हो रहे हैं। इनकी संख्या 5760 है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में जिलों को निर्देश भी दे दिया गया है। आदिवासी ब्लाॅकों में 150 मीटर की परिधि में प्राइमरी, मिडिल व हाइस्कूल संचालित किए जाते हैं, लेकिन अब नए निर्णय के अनुसार, 150 मीटर की परिधि मेें अब केवल एक स्कूल का ही संचालन होगा और उसमें पहली से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इससे स्कूली शिक्षा विभाग का बोझ कम होगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने हमला बोलते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बजाय कॉलेजों को बंद कर निजीकरण की तैयारी कर रही है। एक तरफ सरकार हर 3 किलोमीटर पर कॉलेज खोलना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ 51 स्कूल बंद कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि इसी तरह कॉलेज बंद होते रहे तो शिक्षा का यूनिवर्सलाइजेशन कैसे होगा?

बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करना शुरू कर दिया है। बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कहा कि सरकार ने यह फैसला सोच समझकर लिया है। इससे बंद पड़े कॉलेजों में लगने वाले पैसे को कहीं और निवेश किया जाएगा।

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