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अदालत का समय बर्बाद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया उत्तर प्रदेश सरकार पर जुर्माना

अपने फैसलों को लेकर जनता को चौंकाने वाली योगी सरकार के सामने उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक मामले की सुनवाई के चलते जुर्माना लगा दिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को एक मामले में अदालत का समय बर्बाद करने को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर 15,000 रुपए का जुर्माना लगा दिया, जिसमें राज्य ने 500 दिनों के विलंब के बाद शीर्ष अदालत में एक अपील दायर की थी।

न्यायमूर्ति एस के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपील दायर करने में विलंब पर गौर करते हुए कहा कि फाइल किस तरह से आगे बढ़ती है उसकी तारीख तय करने में भी ‘शिष्टाचार’ नहीं दिखाया गया। इस पीठ में न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश राय भी शामिल थे। इसने एक दिसंबर को जारी आदेश में कहा, ‘विशेष अनुमति याचिका में 576 दिनों का विलंब हुआ है (वरिष्ठ वकील के मुताबिक 535 दिन)। फाइल किस तरह से आगे बढ़ती है उसकी तारीख तय करने में भी शिष्टाचार नहीं दिखाया गया, संभवत: इसलिए हम निर्देश दे रहे हैं कि विलंब के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और ऐसे लोगों से जुर्माना वसूला जाए।’

पीठ ने आगे कहा, ‘हम विलंब के आधार पर विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हैं लेकिन अदालत का समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ता को 15,000 रुपए ‘उच्चतम न्यायालय एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड कल्याण कोष’ में जमा कराने के लिए कहते हैं।’

सुप्रीम कोर्ट अक्तूबर 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के खंडपीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जनवरी 2018 में एकल पीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। एकल पीठ ने एक व्यक्ति की सेवा नियमित करने की संबंधित जिम्मेदारी विभाग को आदेश के तौर पर पूरी करने को दी थी।

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