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किसान आंदोलन को लेकर कंगना और सिंगर दिलजीत दोसांझ ट्विटर पर शब्दों की मर्यादा भूल एक-दूसरे पर हुए हमलावर

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों का आज आठवां दिन है। किसान आंदोलन को लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना राणावत अपने बयानों को लेकर आम नागरिकों के साथ कई सेलिब्रिटीज के निशाने पर बनी हुई है। अब एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ और कंगना राणावत के बीच ट्विटर पर जुबानी जंग छिड़ गयी है।

 

कंगना राणावत और दिलजीत दोसांझ गुरुवार को ट्विटर पर किसान आंदोलन को लेकर एक दूसरे को भला-बुरा कहने में लगे हुए हैं। दरअसल, कंगना ने पिछले दिनों किसानों आंदोलन में शामिल बुजुर्ग महिला को शाहीन बाग की बिलकिस बानो बताते हुए मजाक उड़ाया था कि किसान आंदोलन में पंजाब की ये महिलाएं 100 रुपए में लाई गई हैं। इस अमर्यादित टिप्पणी पर दिलजीत दोसांझ ने कहा कि इतना अंधा नहीं होना चाहिए।

दिलजीत दोसांझ के इसी ट्वीट का जवाब देते हुए कंगना राणावत ने लिखा कि “ओ करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी नागरिकता के लिए लिए प्रदर्शन कर रही थी, वही बिलकिस बानो दादी जी किसानों के MSP के लिए भी प्रदर्शन करती हुई दिखी। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्‍या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने? इसे तुरंत खत्‍म करो।”

 

कंगना राणावत के ट्वीट का जवाब देते हुए दिलजीत दोसांझ ने लिखा, “तूने जितने लोगों के साथ फिल्म की तू उन सबकी पालतू है…? फिर तो लिस्ट लंबी हो जाएगी मालिकों की…? ये बॉलीवुड वाले नहीं पंजाब वाले हैं… झूठ बोलकर लोगों को भड़काना और इमोशन से खेलना आप अच्छे से जानती हो।” वहीं कंगना ने दिलजीत को इस पर जवाब दिया, ओ चमचे चल, तू जिनकी चाट चाट के काम लेता है, मैं उनकी रोज बजाती हूं, ज्यादा मत उछल, मैं कंगना रनौत हूं तेरे जैसी चमची नहीं।

कंगना ने दिलजीत को जवाब देते हुए ट्वीट में लिखा, ‘सुनो गिद्दों मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी मत समझना, मैं सब देख रही हूं किस किस तरह से तुम झूठ बोलकर मासूमों को भड़का रहे हो और उनका इस्तेमाल कर रहे हो, जब शाहीन बाग की तरह इन धरनों का रहस्य खुलेगा तो मैं एक शानदार स्पीच लिखूंगी और तुम लोगों का मुंह काला करूंगी- बब्बरशेरनी’

केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्मविभूषण सम्मान भारत सरकार को लौटा दिया है। कृषि कानूनों के विरोध में धरने पर बैठे किसानों के समर्थन में शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी गुरुवार को पद्मभूषण सम्मान वापस कर दिया है।

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