Breaking NewsTop NewsWorldक्राइममहाराष्ट्रराजनीतिवायरलसोशल मीडिया

मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में सांसद साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों को 3 दिसंबर से लगातार सुनवाई में रहना होगा हाजिर

साल 2008 में रमजान के पवित्र महीने में महाराष्ट्र के मालेगांव के अंजुमन चौक और भीखू चौक पर सिलसिलेवार बम धमाकों में छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि 101 लोग घायल हुए थे। इसी मामले की जांच को लेकर एनआईए की विशेष अदालत में मालेगांव बम धमाके मामले से जुड़े मुकदमे की सुनवाई 3 दिसंबर 2020 से शुरु होगी। चूंकि अब निचली अदालतों में भी प्रत्यक्ष सुनवाई शुरु हो गई है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने इस मामले की आरोपी व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी आरोपियों को 3 दिसंबर को गुरुवार को कोर्ट में उपस्थित रहने को कहा है। बता दें कि अब इस मामले की सुनवाई रोजाना होगी और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। अब तक इस मामले से जुड़े 495 में 140 गवाहों की गवाही हो चुकी है।

पिछले दिनों धमाके के एक पीड़ित ने कोर्ट में आवेदन दायर कर इस मामले की सुनवाई शीघ्रता से शुरु करने के लिए निवेदन किया था। आवेदन में दावा किया गया है कि अभियोजन पक्ष इस मामले से जुड़े गवाहों को बुलाने में सक्रियता नहीं दिखा रहा है। हालांकि अभियोजन पक्ष ने दावा किया है कि उसने कभी मामले की सुनवाई को टाले जाने का आग्रह नहीं किया है। आरोपियों के वकील की ओर से ही सुनवाई को टालने का आग्रह किया गया है।

उल्लेखनीय है कि अभियोजन पक्ष के मुताबिक पिछले न्यायाधीश के सेवानिवृत्त हो जाने व कोरोना महामारी के चलते सुनवाई में विलंब हुआ है। विदित हो कि इस मामले में भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर चतुर्वेदी आरोपी हैं।

उक्त मामले में आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य करना) और 18 (आतंकी साजिश रचना) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 324 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 153ए (दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।

Tags
Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Close