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लेखिका अरुंधति रॉय को दक्षिण कोरिया का साहित्यिक ग्रैंड लॉरेट पुरस्कार दिया जाएगा

मानवाधिकार और शोषण के विभिन्न स्वरूपों के ख़िलाफ़ मुखर रहने वाली प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय को इस साल का दक्षिण कोरिया का प्रतिष्ठित ली हो छ पुरस्‍कार दिया जाएगा। यह साहित्यिक पुरस्कार शांति प्रयासों में योगदान के लिए दिया जाता है जिसकी स्‍थापना 2017 में की गयी थी।

बता दें कि ली हो छ दक्षिण कोरिया के एक महान लेखक थे जिनके नाम पर यह पुरस्‍कार बीते तीन साल से दिया जा रहा है। ली हो छ के लेखन को कोरियाई प्रायद्वीप के एकीकरण और शांति की दिशा में महत्‍वपूर्ण माना जाता है। इससे पहले यह पुरस्‍कार कोरिया/जापान के किम सुक बुम, फलस्‍तीन के सहर खलीफ़े और सोमालिया के नूरुद्दीन फ़राह को दिया जा चुका है।

इस साल का कोरियाई ग्रैंड लॉरेट पुरस्कार जीतेन वाली अरुंधति रॉय ने अपने पहले उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्माल थिंग’ के लिए साल 1997 में बुकर पुरस्कार जीता था। उन्होंने तब से धार्मिक भेदभाव और वर्ग संघर्ष और दुनिया भर में सत्ता और पूंजी के आतंक के खिलाफ़ नागरिक आंदोलनों और नॉन फिक्शन लेखन पर ध्यान केंद्रित किया है। उनका दूसरा उपन्यास लगभग 20 साल बाद ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ आया था। डेब्यू के 20 साल बाद प्रकाशित, हैप्पीनेस ने रॉय ने भेदभाव की आलोचना की है। एलएलपीपी की चयन समिति ने चयन का कारण बताते हुए कहा, “रॉय की साहित्यिक भावना लेखक ली होचुल के अनुरूप है, वो भारत की समस्याग्रस्त चेतना के इतिहास में लगातार शांति के लिए प्रयास करती आ रही हैं। “

ऑनलाइन साक्षात्कार में, ज़ूम के माध्यम से कोरियाई संवाददाताओं से रॉय ने कहा, “साहित्यकार की भूमिका उस दुनिया के बारे में लिखना है जिसमें वो रहता है। “उन्होंने आगे कहा,” पश्चिमी उदारवादी विमर्श ने अतीत में कला और राजनीति को बहुत ही कृत्रिम तरीके से अलग किया है; वहाँ कहा गया है इस तरह का संदेह कि कला और साहित्य को राजनीति से अलग किया जाना चाहिए, और यह एक तरीका है यथास्थिति को बनाए रखना।” साथ ही, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह उपन्यासों का राजनीतिक संदेश के साधन के इस्तेमाल करने का विरोध करती हैं। उनके अनुसार, एक उपन्यास दुनिया में मौजूद जटिलताओं को देखने और लिखने में है, चाहे वह राजनीति हो या लैंगिक और उपन्यासों में अपने विश्वासों को यह कहते हुए व्यक्त किया जाना चाहिए कि, “कल्पना (कथा) सत्य है।”

युनपिंयोंग जू डिट्रिक्‍ट ऑफिस, स्‍योल द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि बीते 10 नवंबर को कोरिया प्रेस सेंटर, स्‍योल में अरुंधति रॉय के साथ एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इस आशय की घोषणा की गयी थी। वास्‍तविक पुरस्‍कार समारोह को कोविड के चलते अगले साल के लिए टाल दिया गया है। समारोह के वक्‍त अरुंधति रॉय को सम्मान राशि के रूप में करीब 3 करोड़ 32 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस साल शांति के लिए ली हो छ साहित्यिक पुरस्‍कार (एलएलपीपी) के लिए चयन समिति ने अरुंधति रॉय को इसलिए चुना क्‍योंकि “रॉय की साहित्यिक चेतना लेखक ली हो छ के समानांतर है कि उन्‍होंने भारत की समस्‍याग्रस्‍त चेतना के इतिहास में निरंतर शांति के लिए प्रयास किया है।”

Eunpyeong-gu (Gu Mayor Kim Mi-kyung) ने अरुंधति के साथ मंगलवार 10 नवंबर को 14:00 बजे एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया। वास्तविक पुरस्कार समारोह को कोविड-19 के चलते अगले साल के लिए स्थगित कर दिया गया है। अगले वर्ष समारोह के बाद अरुंधित रॉय को ग्रैंड लॉरेट को सम्मानित किया जाएगा।

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