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‘सरबजीत’ फिल्म देख हुए प्रेरित, अब तक विदेशों में फंसे सैकड़ों लोगों की करा चुके हैं वतन वापसी

जीवन में आशा की उम्मीद मात्र एक पानी की बूंद से या फिर अंधेरे के दौरान एक छोटे-से दीपक से भी मिल सकती है। यहां तो सयैद आबिद हुसैन ने पूरी फिल्म देखी है तो प्रेरित होने का कोई पैमाना नहीं रहता है। जी हां, ‘सरबजीत’ फिल्म देखने के बाद भारतीय नागरिक सरबजीत के पाकिस्तान की जेल में बंद रखने और परिवार की पीड़ा को देख सयैद आबिद हुसैन ने विदेशों में फंसे नागरिकों को उनके वतन वापसी कराने का एक प्रण लिया था जो वह अब धीरे-धीरे पूरा कर रहे हैं।

सयैद आबिद हुसैन अपने अब तक के प्रयासों से 100 से अधिक लोगों की वतन वापसी करवा चुके हैं। बता दें कि इनमें दूसरे देश के नागरिक भी शामिल हैं। यही नहीं, करीब 10 शवों को उनके परिजनों को सौंपने में भी मदद कर चुके हैं। हुसैन का मानना है कि अगर सरबजीत की बहन के पास कोई जानकार व्यक्ति होता तो उनकी काफी अच्छी मदद की जा सकती थी। फिल्म से प्रेरित होकर आबिद ने विदेशों में फंसे लोगों की मदद करना शुरू किया है। हालांकि फिल्म देखने से पहले भी वो 1-2 शख्स की वतन वापसी करा चुके थे।‌मगर अब फिल्म देखने के बाद अपने इरादों को अधिक बुलंद कर चुके हैं।

सयैद आबिद हुसैन 2016 से ये काम करते आ रहे हैं। खास बात ये है कि इसके लिए वो किसी तरह की कोई रकम नहीं लेते हैं। बता दें कि आबिद से लोग ट्विटर के जरिये संपर्क करते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद लोग उनसे फोन पर संपर्क करके भी मदद मांगते हैं। जिसके बाद वो उस देश से जुड़ी एंबेसी में संपर्क कर पीड़ित परिवार की मदद करते हैं।

साउथ अफ्रीका, यूएसए, कुवैत नेपाल, बेहरीन, पाकिस्तान, सऊदी, कतर, दुबई, ओमान और मलेशिया जैसे देशों में फंसे सैकड़ों भारतीय और दूसरे मुल्क के लोगों को एक मुहिम चला कर देश की मिट्टी और अपनों से मिलवा चुके हैं। आबिद ने अपने प्रयासों से एक पर्वतारोही गौतम राजभर यूपी के अंबेडकर नगर निवासी की भी वतन वापसी कराई। दरअसल गौतम पैसे कमाने के लिए सऊदी अरब चले गए थे। जहां वो फंस गए, कई दिनों तक गौतम का फोन नहीं आया और एक दिन गौतम ने रो-रो कर एक वीडियो डाला। जिसमें वो वतन वापस आने के लिए मदद मांग रहे थे। जिसके बाद आबिद से उसके परिजनों ने संपर्क किया और वो अपने घर वापस आ गए। न जाने ऐसे कितने लोगों की आबिद मदद कर चुके हैं।

उत्तरप्रदेश के अंबेडकर नगर के रुद्रपुर बगाही गांव के रहने वाले सयैद आबिद हुसैन वर्तमान में मध्यप्रदेश के भोपाल में अपनी पत्नी और अपने 11 साल के बेटे के साथ रहते हैं। दरअसल आबिद अपना जीवन व्यतीत करने के लिए इंटीरियर डिजाइनिंग का काम करते हैं।

सयैद आबिद हुसैन ने मीडिया को बताया, 2006 में मैं भोपाल आया था और 2015 तक किसी तरह का कोई सामाजिक काम नहीं किया था। पाकिस्तान निवासी एक 9 साल का बच्चा बांग्लादेश के रास्ते भोपाल आ गया था। मुझे इस मामले की जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद मैंने जद्दोजहद कर उस बच्चे को उसके मुल्क भिजवाया। सयैद आबिद हुसैन ने आगे बताया, कुछ फर्जी एजेंट बड़ी संख्या में मजदूरों की टोली लेकर जाते हैं और फिर वहां उन लोगों से उनके पासपोर्ट छीन लेते हैं। फिर वो लोग दर दर भटकने को मजबूर हो जाते हैं। कई मामलों में यहां से गए हुए लोग बहुत बुरी तरह से परेशान हो जाते हैं, उनके साथ मार पीट जैसी घटना भी होती है। ऐसे पीड़ितों की जानकरी आने लगी। हमने इन मामलों पर गौर करना शुरू किया। 2018 से 2020 तक हमने सैंकड़ों लोगों की मदद भी की।

सयैद आबिद ने बताया, मैं शुरू से ही अकेले काम करता आ रहा हूं, हालांकि शुरूआती वक्त में मेरे साथ कुछ लोग जुड़े जरूर थे, लेकिन बाद में छोड़ गए। उन्होंने आगे बताया, हम मदद करते वक्त किसी का समुदाय या धर्म नहीं देखते हैं। हमारे पास कॉल आती हैं जो कि बेहद पीड़ादायक होती हैं। वो एक हिंदुस्तानी और एक इंसान होता है। हम उसकी जानकारी इकट्ठा करके सम्बन्धित एंबेसी को भेज देते हैं। जिसके बाद उसकी मदद की जाती है। देश की सुरक्षा मेरे लिए महत्वपूर्ण है, अगर कोई सरकार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार या पूछताछ करने के लिए ले जाती है तो उसमें बेगुनाह हो तो आप छूट भी जाते हो। जबरदस्ती सजा किसी को नहीं मिलती है।

इस देश में मुझे कभी एहसास नहीं हुआ कि मेरे खिलाफ दूसरे समुदाय द्वारा आलोचना की जा रही हो। मैं सोशल मीडिया से भी जुड़ा हूं। हमें सभी धर्म के लोग प्रेम करते हैं। मेरे अधिकतर दोस्त दूसरे समुदाय से हैं और मेरी पोस्ट पर बहुत प्रेम से जवाब देते हैं। अच्छा काम करोगे तो लोग तारीफ करेंगे।

पूरी दुनिया में अमन शांति होनी चाहिए, जिस देश में रह रहे हैं, तो वहां के कानून का समर्थन करना चाहिए। निर्देशों को मानना चाहिए, सरकार जो भी फैसले करती है वो सभी के लिए करती है, किसी समुदाय विशेष के लिए कोई नियम नहीं होते। मेरे बिना भी लोग अपनी मदद कर सकते हैं। लोग रोजाना पैरवी नहीं कर पाते तो मैं उनकी पैरवी करता हूं। नेक काम करने से दुआ मिलती है, जिसकी वजह से हमारा व्यापार भी अच्छा चलता है, हमें आर्थिक मदद की जरूरत नहीं और न ही हम किसी से इस मदद का पैसा मांगते हैं।

सयैद आबिद हुसैन को एक कार्यक्रम में सम्मानित करते हुए (फाइल फोटो)

लोगों की मदद कर नेक काम करते हुए सयैद आबिद हुसैन को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 25 से अधिक अवॉर्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है। एक्सीलेंस अवार्ड, राष्ट्रीय प्रेरणा अवॉर्ड, विवेकानंद लीडरशिप, आदि अवॉर्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं। वहीं आबिद को मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की तरफ से भी सम्मानित किया गया है।

✍️ रिपोर्ट: दिनेश दिनकर

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