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अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी को लेकर ठाकरे सरकार पर कंगना राणावत ने साधा निशाना, पत्रकारों को भी लगाई फटकार

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना राणावत लगातार उनके पक्ष में अपनी आवाज़ उठा रही है। अभिनेत्री कंगना ने ट्विटर पर एक वीडियो के माध्यम से अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा है कि अर्नब की गिरफ्तारी पर कोई कुछ नहीं बोल रहा, पत्रकार वर्ग भी चुप है। उन्होंने अपने वीडियो के कैप्शन में लिखा, ‘ये लड़ाई सिर्फ़ अर्नब की या मेरी नहीं है, यह लड़ाई सभ्यता की है, भारतवर्ष की है।’

अपने ट्विटर अकाउंट पर जारी वीडियो की शुरुआत में कंगना राणावत ने पत्रकारों को लताड़ते हुए कहा, ‘मेरी एक फिल्म आई थी, ‘जजमेंटल है क्या’ उसके प्रेस कॉन्फ्रेंस में मैंने एक जर्नलिस्ट को कहा कि तुमने रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बहुत ग़लत लिखा। थोड़ी बहस हुई, बहस टल गई और इवेंट अच्छे से गया। लेकिन चार पांच घंटो में बहुत सारे लोग इकट्ठे होते हैं जो खुद को जर्नलिस्ट बताते हैं, हज़ारों की तादात में और एक गिल्ड बनाते हैं जिसे सरकार की तरफ से कोई पहचान नहीं मिली है। वो ये घोषणा करते हैं कि कंगना की फिल्म को बैन कर दिया जाए।’

 

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना राणावत ने आगे कहा कि उसके पीछे कारण यह था कि सभी प्रोडक्शन हाउस ने उन्हें बैन कर दिया था। बावजूद इसके उनकी उससे पहले वाली फिल्म बड़ी हिट साबित हुई थी। उन्होंने आगे कहा, ‘लोगों को डर हो गया कि इसकी राष्ट्रवादी आवाज़ ज़्यादा स्ट्रॉन्ग ना हो जाए और दूर तक न जाए। अर्नब गोस्वामी कितने दिनों से जेल में हैं, कोई जर्नलिस्ट गिल्ड नहीं बनी, किसी ने कुछ नहीं कहा, हाई कोर्ट खुद कह रहा है कि ये गलत है फिर भी कोई कुछ नहीं कह रहा।’

कंगना का यह भी कहना है कि देश में राष्ट्रवादी आवाजें बहुत कम हो गईं हैं। उन्होंने कहा, ‘देख रहे हैं आप देश में कितनी कम राष्ट्रवादी आवाजें हो गईं हैं और लॉबी कितनी स्ट्रॉन्ग हैं। मैं अमेरिका का उदाहरण देती हूं, आज ट्रंप सत्ता में नहीं हैं तो इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा होगा चीन को और वो देश जो आतंकवाद फैलाते हैं। इन विदेशी शक्तियों ने उनका वोटिंग सिस्टम ही हाईजैक कर लिया है पूरी तरह से। ये शक्तियां भारत को भी कंट्रोल कर रही हैं।’

अभिनेत्री कंगना ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, ‘हमारे यहां कुछ अच्छे लोग हैं, फिर भी हम उनके साथ संघर्ष कर रहे हैं। आपका जागना बहुत ज़रूरी है, सोचिए! जब भी कुछ खरीदते हैं, सोचिए कि वो राष्ट्रवाद में हेल्प करेगा या नहीं। किसी जर्नलिस्ट को देखते हैं, कोई किताब पढ़ते हैं तो सोचिए कि उनकी आइडियोलॉजी क्या है।’

गौरतलब है कि आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने के एक मामले में बुधवार को हुई गिरफ्तारी के बाद से रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। दूसरी तरफ अर्नब गोस्वामी ने मुंबई पुलिस पर अपने और परिवार के साथ मारपीट का आरोप लगाया है।

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