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आसाराम की करतूतों पर आधारित किताब ‘गनिंग फॉर द गॉडमैन’ के प्रकाशन पर रोक से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार

नाबालिग से रेप के आरोप में उम्रकैद की सजा भुगत रहे आसाराम बापू की करतूतों पर आधारित किताब ‘गनिंग फॉर द गॉडमैन’ को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि पुस्तक तथ्यों पर आधारित नहीं है यह आसाराम बापू के जीवन का एक नाटकीय रूपांतरण है, किताब खुद कहती है कि यह नाटककीय रूपांतरण है, किताब में कहा गया कि शिल्पी को महिलाओं और लड़कियों की खरीद के लिए चित्रित किया गया है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आपने पहले दिल्ली हाईकोर्ट में यह शिकायत की है जो यहां बता रहे हैं? अगर नहीं, तो राहत के लिए हाइकोर्ट वापस जाइए। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इन आपत्तियों को हाइकोर्ट के आदेश में दर्ज नहीं किया गया था और याचिकाकर्ता को दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष इस शिकायत को उठाना चाहिए था। बता दें क‍ि हार्पर कॉलिन्स ने हाईकोर्ट में लगाई अपील में आसाराम के ऊपर लिखी गई किताब ”गनिंग फॉर द गॉडमैन: द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम कन्विक्शन” के प्रकाशन पर लगी अंतरिम रोक को हटाने का अनुरोध किया है।

”गनिंग फॉर द गॉडमैन: द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम कन्विक्शन” पुस्तक का कवर पेज (साभार: सोशल मीडिया)

हार्पर कॉलिंस की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा की यह प्रवृत्ति अब बहुत बढ़ गई है कि पुस्तक के विमोचन के दौरान लोग कोर्ट जाकर एकतरफा स्टे-ऑर्डर ले आते हैं। पुस्तक वितरकों के पास तक पहुंच चुकी है। एडवोकेट सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि पुस्तक की 5 हजार प्रतियां छप चुकी हैं। 5 सितंबर को इसका विमोचन होना था, लेकिन 4 सितंबर को कोर्ट की तरफ से किताब पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

दरअसल न्यायमूर्ति नजमी वज़िरी की एकल पीठ ने 22 सितंबर, 2020 को हार्पर कॉलिन्स को उनकी पुस्तक ‘गनिंग फ़ॉर द गॉडमैन’ के लिए आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी दी थी।

आसाराम के खिलाफ बलात्कार के आरोप में कोर्ट में चली सुनवाई और उस दौरान की घटनाओं को लेकर लिखी गई पुस्तक गनिंग फॉर द गॉडमैन: द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम कनविक्शन ’, अजय लांबा, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, जयपुर और संजीव माथुर द्वारा लिखी गई है और इसे 5 सितंबर, 2020 को जारी किया जाना था। लेकिन उससे एक दिन पहले ही याचिका कोर्ट में लगाकर इस किताब के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई। प्रकाशक की तरफ से इस मामले में वकील के तौर पर पेश हुए कपिल सिब्बल का तर्क था कि ये पुस्तक बलात्कार के मामले के रिकॉर्ड के आधार पर लिखी गई है और यह जांच अधिकारी की अपनी कहानी है। पूरी कहानी सुनवाई के दौरान पेश साक्ष्यों और आसाराम व शिल्पी को दोषी करार दिए जाने के फैसले पर आधारित है।

निचली अदालत से जिस महिला की अर्जी पर पुस्तक के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा है उस महिला की ओर से पेश हुए वकील देवदत्त कामत ने कहा कि किताब में मानहानि करने वाली सामग्री मौजूद है। एडवोकेट कामत ने तर्क दिया कि मुफ्त भाषण का अधिकार इस जिम्मेदारी के साथ आया है कि इससे दूसरों के अधिकारों की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचे। अब मंगलवार को हाईकोर्ट से आने वाले फैसले के बाद यह तय होगा कि आशाराम पर लिखी गई ये किताब आम लोगों के लिए बाजार तक पहुंच पाएगी या फिर इस पर लगा स्टे बरकरार रहेगा।

”गनिंग फॉर द गॉडमैन: द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम कन्विक्शन” किताब को अजय पाल लांबा ने लिखा है। अजय पाल लांबा फिलहाल जयपुर में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त हैं। उन्होंने आसाराम की गिरफ्तारी करने वाली टीम की अगुवाई की थी। इस किताब के सह-लेखक संजीव माथुर हैं। बता दें कि अप्रैल 2018 में जोधपुर की स्पेशल कोर्ट ने आसाराम को एक नाबालिग से रेप का दोषी पाया था। आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इस मामले में सह-आरोपी संचिता गुप्ता उसी हॉस्टल की वॉर्डन थी, जहां नाबालिग 2013 से रह रही थी।

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