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चपरासी ने की हुई थी बैचलर डिग्री, सुप्रीम कोर्ट ने PNB के चपरासी को नौकरी से हटाया, पढ़िए पूरा मामला

देश में चारों ओर बेरोजगारी का आलम यह है कि कोई चपरासी या क्लर्क स्तर की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला जाता है तो MBA, PhD किए हुए बेरोजगार युवा नौकरी का आवेदन लेकर पहुंच जाते हैं। पिछले दिनों भारतीय रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा में देश के वरिष्ठ शैक्षणिक संस्थान आईआईटी से डिग्री लेकर निकले एक अभ्यर्थी ने उत्तीर्ण कर ग्रुप डी पद की नौकरी ज्वाइन की थी। किंतु पंजाब नेशनल बैंक के एक चपरासी को डिग्रीधारी होना उसकी नौकरी के लिए मुसीबत बन गया।

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक बैंक चपरासी को नौकरी से हटाने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि चपरासी पद पर नियुक्ति के लिए स्नातक होना अनिवार्य योग्यता से अधिक है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अमित कुमार दास की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने यह दलील मानने से इनकार कर दिया कि ज्यादा शैक्षणिक योग्यता किसी व्यक्ति को अयोग्य ठहराने का आधार नहीं हो सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पंजाब नेशनल बैंक के एक चपरासी की सेवा समाप्त करने के आदेश को बरकरार रखा। बैंक ने स्नातक होने की जानकारी छिपाने पर चपरासी को नौकरी से हटाने का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा हाईकोर्ट के इस बारे में दिए गए दो फैसलों को भी खारिज कर दिया।

बता दें कि उड़ीसा हाईकोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक को चपरासी को दोबारा बहाल करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैंक ने विज्ञापन में स्पष्ट किया था कि आवेदक स्नातक नहीं होना चाहिए, इसके बावजूद अमित ने शैक्षणिक योग्यता छिपाकर आवेदन किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक पहले के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि महत्पूर्ण जानकारी छिपाना और गलत बयानी करना कर्मचारी के चरित्र और उसके परिचय पर असर डालता है।

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