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तलाक की अर्जी लेकर पहुंचे पति-पत्नी, कोर्ट ने कहा- पहले करवा चौथ मनाकर आओ, फिर करेंगे सुनवाई

फैमिली कोर्ट अक्सर तलाक़ के मामलों में यह प्रयास करता है कि दोनों पक्षों की सही से काउंसलिंग करके अंतिम निर्णय लिया जाए ताकि फैसले में तलाक होने या ना होने का दोनों पक्षों के निजी जीवन, पारिवारिक जीवन और आर्थिक दृष्टिकोण पर क्या प्रभाव पड़ेगा। बहुत से मामलों में कोर्ट दोनों पक्षों की काउंसलिंग और पारिवारिक जीवन की गंभीरता को समझते हुए उन्हें फिर से साथ रहने का सुझाव देता है। मध्यप्रदेश की एक फैमिली कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया जिसमें महिला ने आरोप लगाया कि उसने शादी इसी शर्त पर की थी कि वह पढ़ाई नहीं छोड़ेगी। पहले तो उन्होंने महिला की इस शर्त पर हामी भर दी थी किन्तु शादी के बाद पढ़ाई बंद करवा दी। इस बात पर पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला तलाक तक पहुंच गया। कोर्ट ने मामले को काउंसलिंग के लिए भेजा।

काउंसलिंग में दोनों पक्षों को बुलाया गया, जहां पीड़ित महिला की सास और पति पहुंचे। दोनों ने बहू पर कई आरोप लगाए। काउंसलर नुरुनिशा खान ने महिला को समझाया और मामले की जानकारी जज को दी। कोर्ट ने महिला से कहा कि पहले ससुराल जाकर करवा चौथ मनाकर आओ, फिर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को बनाकर देना। मामले की सुनवाई अब 11 नवंबर की है। महिला काउंसलिंग सभागार से ही मंगलवार को पति और सास के साथ चली गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इस मामले को लेकर काउंसलर नुरुनिशा खान ने बताया कि महिला की सास नहीं चाहतीं कि बेटे का परिवार टूटे। वे बहू को मनाती रहीं। कई बार तीनों पुरानी बातों को लेकर भावुक भी हुए। इसे देखकर लगा कि परिवार बस सकता है। वहीं दूसरी तरफ महिला ने अपने परिवाद में आरोप लगाया कि उसकी शादी के लिए ससुराल वाले रिश्ता लेकर आए थे। उस समय वह पढ़ाई कर रही थी। पति बरेली, रायसेन में नगरपालिका में क्लर्क हैं। वह 12वीं पास है, जबकि मैंने ग्रेजुएशन किया था। मेरेे माता-पिता ने 12वीं पास लड़के से शादी इसलिए कर दी, क्योंकि वह सरकारी नौकरी करता है। शादी तय होने के दौरान स्पष्ट कह दिया था कि मैं आगे पढ़ाई और नौकरी करूंगी, जिसे सबने स्वीकार कर लिया था। शादी के दौरान मैं लॉ कर रही थी। मगर शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने जबरदस्ती मेरी पढ़ाई रुकवा दी। महिला ने आगे बताया कि वह अपना कैरियर बनाना चाहती है, मगर पति नहीं चाहता कि वह घर से बाहर निकले। इसे लेकर दोनों के बीच कहासुनी होने लगी और बात मारपीट तक पहुंच गई।

काउंसलर नुरुनिशा खान ने बताया कि सास और पति ने स्वीकार किया है कि शादी के पहले उन्होंने पढ़ने जारी रखने और भविष्य में नौकरी करने की हामी भरी थी। उनका मानना था कि बहू लॉ की पढ़ाई करने के बाद अपनी घर गृहस्थी संभाल लेगी, लेकिन बहू ने आगे पढ़ने और नौकरी करने की जिद पकड़ ली। सास का कहना था कि वह नहीं चाहती कि बेटे का परिवार टूटे। काउंसलिंग के दौरान महिला की सास ने कहा कि बेटे की शादी को 3 साल हो रहे हैं। बहू ने केवल पहला करवा चौथ ससुराल में किया था। उसके बाद से ही मायके में है। सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए फैमिली कोर्ट ने अब पति-पत्नी को घर जाकर करवा चौथ मनाने की बात कही है और इस बारे में रिपोर्ट कोर्ट को बनाकर देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर की है।

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