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पीएम मोदी और चंडीगढ़ हाइकोर्ट के आदेश को नज़रंदाज़ कर खट्टर सरकार ने लॉन्च की विधायकों की गाड़ियों के लिए विशेष झंडी

तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीआईपी कल्चर खत्म करने का एक प्रयास किया था। मई 2017 से देश में नेताओं की गाड़ियों से लालबत्ती व झंडियां हटवा दीं गई। लेकिन अब खुद पीएम मोदी की पार्टी की खट्टर सरकार ने ही पीएम मोदी के उस आह्वान को नज़रंदाज़ करते हुए फिर से अपने स्तर पर वीआईपी कल्चर का विकल्प खोज निकाला है। हरियाणा में विधायक अब अपनी गाड़ी पर मैरून कलर की झंडी लगा सकेंगे, जिस पर हरियाणा विधानसभा का लोगो और नीचे एमएलए लिखा हुआ है। एमएलए लिखी इस झंडी के वाहन पर लगने के बाद अब विधायकों का पुराना वीआइपी कल्चर वाला रूतबा लौटने की उम्मीद की जा रही है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर विधायकों की गाड़ियों के लिए मैरून रंग की झंडी लाॅन्च करते हुए

बता दें कि मंगलवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा, संसदीय कार्यमंत्री कंवरपाल गुर्जर ने विधायकों की गाड़ियों पर लगाने के लिए विधानसभा के लोगो (Logo) की मैरून रंग की झंडी लाॅन्च की। बताया जा रहा है कि ये झंडी जल्द ही हरियाणा के सभी विधायकों को दी जाएंगी।

अनुमान के मुताबिक,‌ इस झंडी से अब विधायकों की गाड़ी दूर से ही पहचानी जाएगी। इसलिए हरियाणा सरकार के इस फैसले से सभी विधायक खुश नजर आ रहे हैं। हरियाणा के विधानसभा स्पीकर से लेकर विधायक तक इस झंडी को वीआईपी कल्चर मानने से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह विधायक की पहचान के लिए तैयार कराई गई है। इसे लेकर परिवहन विभाग, गृह विभाग व मुख्यमंत्री से भी अनुमति ली गई है। कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली गई।

हरियाणा में विधायकों की विशेष पहचान के तहत उनकी गाड़ियों पर लगेगी यह मैरून रंग की झंडी

बताया जा रहा है कि अपनी गाड़ियों पर विशेष झंडी की मांग हरियाणा के विधायकों ने ही विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता के सामने रखी थी। ज्यादातर विधायकों ने यही कहा था कि उनकी कोई पहचान होनी चाहिए। क्योंकि टोल बूथों पर उन्हें रोक लिया जाता है। जब एमएलए का कार्ड दिखाते हैं, तो उसे मान्य तक नहीं करते। रास्ते में कहीं भी पुलिस कर्मचारी रोक लेते हैं। इससे उन्हें समय अभाव की दिक्कत होती है। इसके बाद विधानसभा स्पीकर ने इस मामले पर सभी संबंधित विभागों से सलाह करके आखिरी फैसला लिया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस झंड़ी कल्चर को लेकर कुछ मुख्य बातों पर‌ चर्चा की।
• गाड़ी में यदि विधायक नहीं हैं और कोई दूसरा व्यक्ति अगर यह गाड़ी लेकर जाता है तो उसे इस झंडी को कवर करना होगा।
• झंडी के गलत इस्तेमाल और ऐसी दूसरी नकली झंडी बनाने पर संबंधित आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
• यदि मौजूदा विधायक के पास अपने नाम से पंजीकृत कोई वाहन नहीं है, तो झंडी का इस्तेमाल निजी या किराए के वाहनों पर किया जा सकता है।
• झंडी के इस्तेमाल के लिए परिवहन आयुक्त की ओर से पत्र जारी किया जाएगा। यह पत्र हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने या मौजूदा विधायक के विधानसभा का सदस्य रहने तक वैध रहेगा।

गौरतलब है कि साढ़े तीन वर्ष पूर्व अप्रैल 2017 में केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय मोटर व्हीकल नियमावली में संशोधन कर पूरे देश में सरकारी वाहनों से लाल बत्ती हटवाकर वीआइपी व्यवस्था समाप्त कर दी थी। जिसके बाद 1 मई से किसी भी वाहन पर लाल या नीली बत्ती लगाने पर पूरी तरीके से प्रतिबंध लगा दिया था। वर्तमान में संसद सदस्यों को भी अपने वाहनों पर किसी प्रकार की झंडी लगाने की छूट नहीं दी गई है। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की डिविजन बेंच में शामिल जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस अमोल रतन सिंह ने वीआइपी कल्चर खत्म करने संबंधी आदेश जारी किए थे। यह आदेश हर तरह के वाहन, आर्मी, प्रेस, चेयरमैन, वाइस चेयरमैन तथा न्यायाधीश का पदनाम दर्शाने पर भी लागू किया गया। केवल एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस वाहन और आपदा परिस्थितियों में राहत प्रदान करने वाले वाहनों को ही इससे छूट दी गई थी।

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