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बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय टिकट की दौड़ में ही हार गए पूर्व हवलदार से, नहीं लड़ेंगे बक्सर सीट से चुनाव

कोरोनाकाल में विश्वभर की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर टिकी हुई हैं किन्तु विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की नजरें बिहार विधानसभा चुनाव पर टकटकी लगाए हुए है। बिहार विधानसभा चुनाव में अनेक रोचक घटनाएं हो रही हैं और बिहार में सरकार बनने तक दिलचस्प जोड़-तोड़ देखने को मिलना स्वाभाविक है। बिहार विधानसभा चुनाव में बक्सर सीट पर चुनाव लड़ने का सपना सजाए हुए बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पद से इस्तीफा दिया था। पुलिस सर्विस से वीआरएस लेने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय जेडीयू का दामन थामकर बक्सर सीट पर टिकट मिलने के लिए हाथ-पैर मार रहे थे किंतु चुनाव लड़ने से पहले ही एक पूर्व हवलदार से यह दौड़ हार गए।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ राज्य के डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय (फाइल फोटो)

पुलिस विभाग में पूर्व हवलदार रहे परशुराम चतुर्वेदी ने ऐसी फिल्डिंग लगाई कि डीजीपी का पद छोड़कर विधायक बनने का ख्वाब देखने वाले गुप्तेश्वर पांडेय चुनाव से पहले ही क्लिन बोल्ड हो गए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खास माने जाने वाले गुप्तेश्वर पांडेय राजनीतिक समीकरण में उलझ कर रह गए। बता दें कि एनडीए के सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत बक्सर सीट बीजेपी के कोटे में चली गई है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने परशुराम चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया है। पुलिस की नौकरी में हवलदार पद पर रहे किसान नेता परशुराम चतुर्वेदी जेडीयू के डीजीपी पद छोड़कर आए गुप्तेश्वर पांडेय पर राजनीतिक दबदबे में हावी पड़ गए और बिहार के पूर्व डीजीपी चुनाव लड़ने से पहले ही अपने विभाग के पूर्व हवलदार से हार गए।

जानकारी के मुताबिक, जेडीयू ने एनडीए के सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत अपने 115 लोगों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें किसी भी सीट पर गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट नहीं दिया है। टिकट न मिलने से निराश बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने साफ कर दिया है कि वह इस बार बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। गुप्तेश्वर पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘अपने अनेक शुभचिंतकों के फोन से परेशान हूं, मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूं। मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा। हताश निराश होने की कोई बात नहीं है। धीरज रखें, मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है। मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा। कृपया धीरज रखें और मुझे फोन नहीं करें। बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है।’

टिकट ना मिलने पर मीडिया से बात करते हुए गुप्तेश्वर पांडेय

बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय ने 11 साल पहले भी राजनीतिक मैदान में किस्मत आजमाने के लिए 2009 में वीआरएस ले लिया था किन्तु तब भाजपा के हाथों उन्हें निराशा मिली थी। तब के लोकसभा चुनावों की तैयारियों के बीच चर्चा चल रही थी कि गुप्तेश्वर पांडेय बिहार की बक्सर लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। गुप्तेश्वर पांडे को उम्मीद थी कि बक्सर से बीजेपी के तत्कालीन सांसद लालमुनि चौबे को पार्टी दोबारा से प्रत्याशी नहीं बनाएगी। ऐसे में वह पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देकर सियासी गोटियां सेट करने में लगे थे। बीजेपी नेताओं के साथ पांडेय ने अपने समीकरण भी बना लिए थे और टिकट मिलने का पूरा भरोसा भी हो गया था। गुप्तेश्वर पांडेय के नाम की घोषणा होती उससे पहले ही बीजेपी नेता लालमुनि चौबे ने बागी रुख अख्तियार कर लिया। इससे बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए लालमुनि चौबे को ही मैदान में उतारने का फैसला करना पड़ा था। इस्तीफा दे चुके पांडेय के सियासी अरमानों पर पानी फिरने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय दोबारा से पुलिस सर्विस में वापसी कर गए थे।

इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में दिलचस्प बात यह है कि दोबारा से उसी बक्सर सीट पर चुनावी मैदान में उतरने के लिए गुप्तेश्वर पांडेय ने डीजीपी का पद छोड़ दिया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में जेडीयू की सदस्यता भी ले ली किंतु सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत बक्सर सीट पर बीजेपी ने पूर्व हवलदार परशुराम चतुर्वेदी को टिकट दे दिया है। दो बार पुलिस सर्विस से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने के अरमान अधूरे रहना गुप्तेश्वर पांडेय के लिए राजनीतिक तौर पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

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