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बाबरी विध्वंस मामले पर आरोप मुक्त होने पर पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने लगाए जयश्री राम के नारे, वीडियो संदेश किया ज़ारी

उत्तर प्रदेश की बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के फैसले पर बीजेपी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने खुशी जताई है। अपने एक वीडियो संदेश में बीजेपी के वरिष्ठ नेता आडवाणी ने कोर्ट के इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है। बता दें कि लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी सभी 32 लोगों को बरी कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (फाइल फोटो)

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि बहुत समय बाद अच्छा समाचार मिला‌ है। उन्होंने जय श्री राम का नारा भी लगाया। बता दें कि बीजेपी नेता आडवाणी ने अपने वीडियो संदेश में कहा, ‘आज जो निर्णय हुआ है वह काफी महत्वपूर्ण है। यह काफी खुशी वाला दिन है। काफी दिनों बाद कोई खुशी का समाचार मिला है। स्पेशल कोर्ट का जो निर्णय हुआ है वह अत्यंत महत्वपूर्ण है।’ आडवाणी ने इसके बाद जय श्रीराम का नारा भी लगाया। आडवाणी ने कहा, ‘इस फैसले ने मेरे निजी और बीजेपी का राम जन्मभूमि मूवमेंट की भावना को भी सही साबित किया है। मैं इस फैसले का तहेदिल से स्वागत करता हूं।’

बता दें कि सीबीआई की विशेष अदालत ने बाबरी विध्वंस केस में आरोपी सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विध्वंस की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और यह घटना अचानक हुई थी। कोर्ट ने सीबीआई के कई साक्ष्यों को भी नहीं माना है और 28 साल से चले आ रहे इस विवाद पर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह पूर्व नियोजित घटना नहीं थी बल्कि अचानक हुई थी। अदालत ने कहा कि जो साक्ष्य हैं वो सभी आरोपियों को बरी करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने सीबीआई के साक्ष्य पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि SAP सील बंद नहीं थी और इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत करते हुए विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि सत्य की विजय हुई है। कोकजे ने कहा, “हम अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं। सत्य की विजय हुई है।” उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना को लेकर अदालत का फैसला आने में करीब 28 साल लगे। लेकिन यह बात पहले से स्पष्ट है कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और देश भर से कारसेवकों को ढांचा गिराने के लिए अयोध्या नहीं बुलाया गया था।

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