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कीर्ति चक्र विजेता का परिवार शहीद बेटे के पुरस्कार लौटाने पहुंचा राजभवन, कहा- राज्य सरकार शहादत का सम्मान करने में रही नाकाम

हमारी केंद्र और राज्य सरकारें देश के शहीद जवानों की शहादत का बदला लेने का प्रण लेती रहती हैं और इन शहीदों के नाम पर देश के युवाओं में देशभक्ति का जज्बा पैदा करने का प्रयास करती रहती हैं। किंतु बहुत बार हमारी प्रशासनिक और राजनीतिक अव्यवस्था के कारण देश के शहीदों के परिजनों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कांगड़ा जिले के निवासी एवं कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद अनिल चौहान का परिवार सोमवार को वीरता पदक लौटाने शिमला स्थित राजभवन पहुंचा। शहीद के परिवार का आरोप है कि राज्य सरकार शहीद अनिल चौहान की शहादत का सम्मान करने में नाकाम रही है। उल्लेखनीय है कि कीर्ति चक्र शांतिकाल में वीरता के लिए दिया जाना वाला दूसरा सर्वोच्च सम्मान है जबकि अशोक चक्र शीर्ष वीरता पुरस्कार है।

कीर्ति चक्र पदक से सम्मानित शहीद अनिल चौहान का परिवार वीरता पदक लौटाने शिमला में राजभवन पहुंचा

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मुलाकात से पहले शहीद जवान की मां राजकुमारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका बेटा असम में वर्ष 2002 में ‘ऑपरेशन राइनो’ के दौरान मात्र 23 वर्ष की आयु में शहीद हो गया था। कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर निवासी राजकुमारी ने कहा कि प्रदेश सरकार स्कूल का नामकरण शहीद अनिल चौहान के नाम पर करने और गांव में उनकी याद में तोरणद्वार बनाने सहित अपने वादे पूरा करने में नाकाम रही है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की निष्क्रिया और बेटे की शहादत के 18 साल बाद भी वादे पूरे नहीं होने से परेशान होकर वह अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ प्रदेश के राज्यपाल को वीरता पदक लौटाने आई हैं। जब मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर को शहीद जवान के परिजनों की राज्यपाल से मुलाकात करने की जानकारी मिली तो वह राजभवन परिसर के बाहर शहीद की मां से मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री ठाकुर ने शहीद की मां और परिवार के अन्य सदस्यों को भरोसा दिया‌ है कि वह उनकी मांगों को पूरा करने का प्रयास करेंगे।

कीर्ति चक्र पदक (फाइल फोटो)

बता दें कि मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि तत्कालीन राज्य सरकार ने 18 साल पहले शहीद अनिल चौहान के परिवार से कुछ वादे किए थे, जो अब तक पूरे नहीं हुए हैं। सीएम ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन अब पूरे मामले का पता करके कारवाई करेंगे। उन्होंने परिवार से उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय आने को कहा है। परिवार ने कहा कि राज्यपाल से मुलाकात कर वह मुख्यमंत्री कार्यालय जाएंगे।

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