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कॉन्ट्रेक्टर उदय कृष्ण पेड़ों को काटने की बजाय दूसरी जगह करते हैं शिफ्ट, 2200 पेड़ों को बचाते हुए खड़ी कर दी संस्था

बेशक राज्य सरकारें हर साल पौधारोपण करने का काम बड़े जोर-शोर से करती हों किन्तु सरकारी इमारतें खड़ी करने में, सड़कें, पुलों के निर्माण के दौरान इन्हीं पेड़ों को काटने का आदेश भी जारी करती हैं। उदय कृष्ण पेड्डीरेड्डी नामक एक कॉन्ट्रेक्टर ने इसी तरह के अनुभव से पेड़ों को कटने से बचाते हुए इन पेड़ों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की एक शुरुआत की थी जो आज एक संस्था का रुप ले चुकी है। उदय कृष्ण सरकारी प्रोजेक्ट्स की राह में आने वाले पेड़ों को बचाते हुए इन्हें रिलोकेट करते हैं।

गोवा के अंबरोली में गिरे 100 साल पुराने बरगद को भी उदय कृष्ण ने अपनी ‘वट फाउंडेशन’ के जरिए रिलोकेट किया। इसके लिए विदेशी नागरिकों ने भी क्राउड फंडिंग की थी

‘वट फाउंडेशन’ के तहत कॉन्ट्रेक्टर उदय कृष्ण पेड्डीरेड्डी पेड़ों को बिना काटे, कोई नुक्सान पहुंचाए बिना एक जगह से दूसरी जगह पर लगाते हैं। पेड़ कितना ही बड़ा या पुराना क्यों न हो। वट फाउंडेशन के तहत उदय कृष्ण पेड्डीरेड्डी ने वर्ष 2010 में यह काम शुरू किया था और अब तक वट फाउंडेशन करीब 2200 पेड़ों को बचा चुके हैं। वट फाउंडेशन केवल सरकारी प्रोजेक्ट्स की राह में आने वाले पेड़ों को बचाते हुए रिलोकेट करते हैं। उदय कृष्ण अपनी इस मुहिम की शुरुआत के बारे में बताते हैं कि 2010 में हैदराबाद में एक फुटओवर ब्रिज बना रहा था, जिसमें 16 पेड़ों को काटने का निर्णय लिया गया था। मैंने इस निर्णय का विरोध करते हुए तय किया था कि मैं इस तरह पेड़ नहीं कटने दूंगा। मैंने एक प्रयोग किया जिसमें जेसीबी की मदद से 20 साल पुराने बड़े पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह लगाया, इस दौरान मैं 13 पेड़ बचाने में सफल रहा। सरकारी प्रोजेक्ट्स में आने वाले पेड़ों को बचाने के लिए वट फाउंडेशन तीन बार अदालत भी जा चुकी है। अब वट फाउंडेशन को पेड़ रिलोकेट करने के लिए दूसरे राज्यों से भी फोन आने लगे हैं।

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