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रियो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलू को मिलेगा ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’

वर्ष 2020 में कोरोना वायरस के चलते खेलों के मैदान भी विरान नज़र आ रहे हैं लेकिन खेल मंत्रालय के द्वारा जारी एक सूचना के अनुसार भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बैट्समैन रोहित शर्मा, महिला पहलवान विनेश फोगाट, टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा और 2016 पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलू को देश में खेल के सर्वोच्च पुरस्कार ‘राजीव गांधी खेल रत्न’ के लिए नामित किया गया है। बता दें कि राष्ट्रीय खेल पुरस्कार खेल दिवस के मौके पर 29 अगस्त को दिये जाते हैं जो महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन है।

रियो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मरियप्पन थंगावेलू को भी इस साल के ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ से नवाजा जाएगा। 2016 के बाद पहली बार यह पुरस्कार दिए जा रहे हैं। पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए हाई जंपर मरियप्पन ने कहा- ‘मेरा एक ही लक्ष्य था- हाई जंप में रिकॉर्ड बनाऊं। लोग संघर्ष भूल जाते हैं पर रिकॉर्ड इतिहास बन जाते हैं।’ 

भारत को रियो पैरालंपिक खेलों में पहला पदक दिलवाने वाले 25 वर्षीय मरियप्पन थांगावेलू का जीवन बेहद संघर्ष में गुजरा है। मरियप्पन का जन्म तमिलनाडु के सालेम के निकट पेरियावादगमाती गांव में हुआ था। उनकी मां सब्जियां बेचने का काम करती हैं। मरियप्पन ने अपने इलाज के लिए 3 लाख रुपये का लोन भी लिया था। मरियप्पन के बचपन में इनके पिता का निधन हो गया था तथा मरियप्पन के संघर्ष के दौरान मां सब्जी बेचकर परिवार का ख्याल रखती थीं।

जानकारी के मुताबिक, मरियप्पन जब महज पांच साल के थे तब एक बस दुर्घटना में उनका पैर चोटिल हो गया था। स्कूल जाते वक्त एक बस उनके पैर पर चढ़ गई थी, इसमें उनके पैर का घुटना बुरी तरह ज़ख्मी हो गया था जिससे वह हमेशा के लिए विकलांग हो गए। उनकी रुचि बचपन से ही खेलों में थी, शारीरिक अक्षमता के बावजूद उन्होंने स्कूल की तरफ से वॉलीबॉल भी खेला हुआ है। एक बार मरियप्पन के स्पोर्ट्स टीचर ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें ऊंची कूद के लिए प्रेरित किया था। मात्र 15 साल की उम्र में मरियप्पन ने अपनी पहली प्रतियोगिता में भाग लिया और उसमें रजत पदक जीतकर सबको चकित कर दिया था। वह साल 2015 में ऊंची कूद में विश्व नंबर एक बने थे। रियो डी जेनेरियो में आयोजित 2016 ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

रियो पैरालंपिक में अपनी स्वर्णिम सफलता के साथ मरियप्पन थंगावेलू पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय बन चुके हैं। उनसे पहले 1972 में मुरलीकांत पेटकर ने हेजबर्ग में तैराकी और 2004 में देवेंद्र झाझरिया ने भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था।

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