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देश के 10 बैंकों ने कर दिया 19,000 करोड़ रुपये के लोन को ‘राइट ऑफ

कोरोना वायरस के चलते देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किंतु भारतीय बैंकों में एनपीए का बढ़ना कोरोना से पूर्व से जारी है। जिसके चलते देश के 10 बड़े बैंकों ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही 19,000 करोड़ रुपये के लोन को राइट ऑफ कर दिया है। गौरतलब है कि बीते साल की इसी तिमाही के मुकाबले यह राइट ऑफ करीब 10 फीसदी ज्यादा है। 2019 की जून तिमाही में बैंकों ने करीब 17,000 करोड़ रुपये के लोन को राइट ऑफ कर दिया था।

लोन का राइट-ऑफ करना क्या होता है

जब बैंकों को लगता है कि उनके द्वारा वितरित किया गया लोन अब वसूलना मुश्किल हो रहा है और उनकी बैलेंस शीट को‌ गड़बड़ कर रहा है। ऐसे में बैंक उस लोन को ‘राइट-ऑफ’ कर देते हैं। अर्थात् ये मान लेते हैं कि इस लोन की रिकवरी अब हो नहीं पा रही है। इसलिए इस लोन अमाउंट को बैलेंस शीट से हटा देते हैं। जिससे बही-खाते को साफ सुथरा रख सकें।

इतने बड़े पैमाने पर लोन के राइट ऑफ किए जाने से ज्ञात है कि बैंकिंग सेक्टर में एनपीए का संकट कितना बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 4,630 करोड़ रुपये को लोन जून तिमाही में राइट ऑफ किया है। इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया ने 3,505 करोड़ रुपये के लोन अपने बही-खाते से हटा दिए हैं। कैनरा बैंक ने इस अवधि में 3,216 करोड़ रुपये के लोन राइट ऑफ किए हैं। साथ ही, निजी सेक्टर के एक्सिस बैंक ने भी 2,284 करोड़ रुपये के लोन को राइट ऑफ कर दिया है। आईसीआईसीआई बैंक ने 1,426 करोड़ रुपये के लोन अपनी बुक्स से हटाए हैं। इंड्सइंड बैंक ने 1,250 करोड़ रुपये के कर्ज को राइट ऑफ कर दिया है।

फाइनेंशियल ईयर 2019 में देश के बैंकों ने कुल 2.13 लाख करोड़ रुपये के कर्जों को राइट ऑफ किया था। यह ट्रेंड 2020 में कम होने की बजाय़ बढ़ता ही गया और राइट ऑफ का आंकड़ा 2.29 लाख करोड़ रुपये के लेवल पर पहुंच गया। बता दें कि देश के 30 बैंकों ने एनपीए के आंकड़े को अपने बही-खाते से हटाने के मकसद से यह फैसला लिया है। ऐसे में बैंक अपनी बुक्स से इन लोन को राइट ऑफ कर रहे हैं तो ताकि बही-खाते को साफ सुथरा रख सकें।

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