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बेताल के जरिए लोगों की गलतियां और समाधान बताती है सदानंद पाल की ‘लव इन डार्विन’

बिहार के कटिहार जिले में जन्मे लेखक सदानंद पाल गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, रिकार्ड्स होल्डर रिपब्लिक-यूके, रियल वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, स्टार वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। अपनी कल्पनाशीलता का उपयोग करते हुए लेखक ने बेताल के जरिए मानवीय गलतियों का जिक्र करते हुए अहिंसात्मक तरीके से समाधान समझाते हुए एक नाट्य पटकथा ‘लव इन डार्विन’ पाठकों को सौंप दी है।

 

लव इन डार्विन पुस्तक में लेखक ने पश्चिम बंगाल तथा बिहार की पृष्ठभूमि का उपयोग करते हुए सामाजिक तथा राजनीतिक व्यवस्थाओं पर कलम चलाते हुए पाठकों को भविष्य की दुनिया ‘अंतरिक्ष’ से होते हुए ब्लैक होल में प्रवेश करवाते हैं। यह लेखक की कल्पनाशीलता और रचनात्मकता की जीत ही कहा जाएगा कि पाठक यह पुस्तक पढ़ते हुए स्वंय के सामने सभी दृश्य चित्रित रुप में महसूस करते हैं। इस नाटक को तीन अंकों में वर्गीकृत किया गया है जहां प्रथम अंक के प्रथम दृश्य में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा दक्षिण भारतीय राज्यों के लोगों का एक ‘मोना’ नामक चर्चित वेश्या-सह-नर्तकी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से काव्यशैली रुप में संवाद दिखाया गया है। जिसमें पाठक कुछ समय के लिए ठहर जाता है और सोचने लगता है कि पुस्तक को आगे पढ़ना चाहिए या नहीं? यहां जिक्र करना आवश्यक है कि इस प्रथम दृश्य के तुरंत बाद पाठक एक विचित्र दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं जहां एक बेताल और वेश्या के बीच सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर रोचक चर्चा, बेताल की दुनिया, अनेक हास्यास्पद नामों के किरदारों की भूमिका से पाठक आनंदित और लाभान्वित होंगे।

अनेक वर्ल्ड रिकॉर्ड्स अपने नाम कर चुके लेखक सदानंद पाल ने लव इन डार्विन में रोचक तरीके से भूतों की दुनिया में अच्छे-बुरे की पहचान करते हुए बेताल को अच्छा बताया है जो मानव जीवन की परेशानियों के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। कैसे बेताल देश में चल रहे चुनाव में लोगों से बेहतर उम्मीदवार चुनने के लिए चर्चा करता है, कैसे वैश्विक स्तर पर फैली बदले की भावना से मानव जाति को हो रहे नुकसान को नियंत्रण में करता रहता है, कैसे बेताल की दुनिया के कुछ सदस्यों द्वारा मानव की भलाई ना करने पर बेताल प्रमुख द्वारा सज़ा सुनाई जाती है। यह सब रोचक दृश्य पाठक को लव इन डार्विन में मिलेंगे। एक बेताल और चर्चित वेश्या-सह-नर्तकी ‘मोना’ के बीच मनमोहक संवाद स्थापित करते हुए लेखक ने शब्दों का खुबसूरती से उपयोग करते हुए पाठक को अपने इस नाट्य पटकथा से जोड़ने का सफल प्रयास किया है। प्रथम अंक के प्रथम दृश्य को छोड़ दें तो पुस्तक की भाषा शैली बेहद सहज एवं सरल है। लेखक की बुद्धिमत्ता को साधुवाद करता हूं कि उन्होंने इस पुस्तक में विज्ञान और बेताल (प्रेत आत्माओं) को इस पुस्तक के रूप में एक संयुक्त मंच उपलब्ध करवाया है जहां मानव हित के बारे में चर्चा की गई है, जोकि एक अद्भुत विचार है। पुस्तक पढ़ते हुए उम्मीद की जा सकती है कि इस पुस्तक के भाग दो पर काम किया जा सकता है तथा इस नाट्य पटकथा का मंचन भी किया जा सकता है।

साभार: पुस्तक में छपी (पृष्ठ संख्या 58 पर) दैनिक जागरण अखबार की एक कटिंग 

दर्जनों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित आरटीआई कार्यकर्ता, लेखक सदानंद पाल दावा करते हैं कि अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘भूतनाथ रिटर्न्स’ में इस पुस्तक के कुछ दृश्यों की चोरी करते हुए नकल की गई है। जिसका मुंबई की एक कोर्ट में मामला विचाराधीन है। यहां लेखक ने फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, कथा/पटकथा लेखक, मुख्य कलाकार अमिताभ बच्चन तथा अन्य के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का केस दर्ज किया हुआ है।

पुस्तक:- लव इन डार्विन (नाट्य पटकथा)
लेखक:- सदानंद पाल
अंकित मूल्य:- 80 रूपए
प्रकाशन:- संवदिया प्रकाशन (बिहार)
✍️ समीक्षा :- दिनेश दिनकर
समीक्षा हेतू संपर्क सूत्र :-  Livesamaybharat@gmail.com

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