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हरियाणा में 50 करोड़ के घोटाले की जांच पूरी होने से पहले ही निगम कार्यालय में आग लगने से रिकॉर्ड हुआ राख

बेशक भ्रष्टाचार खत्म करने का सपना दिखाते हुए राज्य और केंद्र में भाजपा ने सरकार बनाई हो। किंतु देर सबेर घोटाला होने की सुगबुगाहट सरकार की बजाय जनता को परेशान करने लगती है। हरियाणा में धान घोटाला, शराब घोटाला, रजिस्ट्री घोटाला, एससी-एसटी,ओबीसी छात्रवृत्ति घोटाला जैसे अनेक घोटाले बीजेपी-जेजेपी गठबंधन की सरकार के दौरान चर्चा में आ चुके हैं किन्तु जांच कमेटी बैठाकर सत्ताधारी दल अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने लगते हैं और मुख्य आरोपियों को कोई सजा नहीं मिलती है। भ्रष्टाचार का ताजा मामला बल्लभगढ़ नगर निगम का है। जहां 50 करोड़ के कथित घोटाले की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि इससे पहले ही रविवार को फरीदाबाद नगर निगम कार्यालय में रहस्यमय तरीके से आग लग गई, जिससे अकाउंट ब्रांच में रखा रिकॉर्ड व अन्य सामान जलकर खाक हो गए। रिकार्ड रूम में अचानक लगी इस आग के बाद फिर चर्चा का विषय बन गया है कि इसके पीछे 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच पर पर्दा डालने की साजिश तो नहीं है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला (फाइल फोटो)

बल्लभगढ़ नगर निगम में ऐसे हुआ 50 करोड़ रुपए का घोटाला

बता दें कि 6 जुलाई को बल्लभगढ़ के वॉर्ड नंबर 37 के पार्षद दीपक चौधरी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने वर्ष 2017 से लेकर 2019 तक सभी वार्डों में उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों का ब्यौरा और ठेकेदारों को भुगतान किए गए पैसों की जानकारी मांगी थी। प्राप्त जानकारी का अध्ययन करने के बाद पार्षद दीपक चौधरी ने पाया कि उनके वॉर्ड में 27 ऐसे कार्य हुए हैं जिनमें 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान ठेकेदार को किया गया है। उन्होंने अन्य वार्ड के पार्षदों से संपर्क कर ब्यौरा शेयर किया और जानकारी मांगी तो पता चला कि 40 वॉर्ड में से 10 वॉर्ड ऐसे हैं जहां कोई काम नहीं हुआ है लेकिन ठेकेदार को पेमेंट का भुगतान किया जा चुका है। बल्लभगढ़ के पार्षद दीपक चौधरी सहित पांच पार्षदों ने निगम आयुक्त यश गर्ग को लिखित तौर पर शिकायत दी थी, जिसमें 50 करोड़ रुपये का घोटाला होने का आरोप लगाया था। आरोप के मुताबिक, ठेकेदार को 30 करोड़ रुपये के भुगतान के बदले 80 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसकी शिकायत सरकार तक भी पहुंची। शुरुआती जांच में वित्त नियंत्रक विशाल कौशिक को निलंबित किया गया था

फरीदाबाद नगर निगम के कार्यालय में आग लगने के बाद दफ्तर की हालत।

उक्त 50 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाने वाले निगम पार्षदों ने इसे साजिश के तहत आग लगाए जाने का आरोप लगाया है ताकि दस्तावेज समाप्त करते हुए घोटाले पर पर्दा डाला जा सके। उनका आरोप है कि केवल विकास कार्यों से संबंधित फाइलों को ही इसमें जलाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, रविवार की सुबह करीब पौने आठ बजे अचानक नगर निगम के लेखा शाखा के रिकार्ड रूम में आग लग गई। दमकल विभाग को करीब आठ बजे आग लगने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों ने करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया। फायर ऑफिसर आर०के० खटाना ने बताया कि आग लगने से अंदर रखे सामान व फर्नीचर जलकर खाक हो गए हैं। लेकिन पानी की बौछार से अंदर रखे अन्य कागजात बुरी तरह भीग गए हैं। प्रारंभिक जांच में शार्ट सर्किट से आग लगने की बात सामने आ रही है। फिलहाल अकाउंट ब्रांच को सील कर बंद कर दिया गया है ताकि ये पता लगाया जा सके कि आग कैसे लगी और कौन कौन से रिकॉर्ड जले हैं। निगम कमिश्रर डॉ. यश गर्ग ने इस अग्निकांड की जांच के लिए निगम अधिकारियों की तीन सदस्य एक कमेटी गठित की है। जांच कमेटी सोमवार को दोपहर 3 बजे तक इस पर अपनी रिपोर्ट कमिश्रर को सौंपेगी।

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