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झारखंड के शिक्षा मंत्री ने 11वीं कक्षा में लिया दाखिला, अब राजनीति और पढ़ाई करेंगे एक साथ

वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी के चलते शैक्षणिक संस्थान लगभग बंद पड़े हैं। लेकिन झारखंड राज्य से शिक्षा के क्षेत्र से एक चौंकाने वाली खबर आई है कि झारखंड के शिक्षा मंत्री ने ग्यारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के लिए स्कूल में दाखिला ले लिया है। जानकारी के मुताबिक, बोकारो जिला के बेरमो प्रखंड अंतर्गत नावाडीह स्थित अपने ही देवी महतो महाविद्यालय में उन्होंने सोमवार 10 अगस्त को 11वीं कक्षा में दाखिला ले लिया है।

कॉलेज के कार्यालय कक्ष में जाकर शिक्षा मंत्री ने एडमिशन फॉर्म और 1100 रुपये जमा किए तथा ग्यारहवीं कक्षा के आर्ट्स संकाय में एडमिशन लिया। नामांकन की प्रक्रिया के बाद शिक्षा मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह सारा काम देखते हुए सब कुछ करेंगे। ‘क्लास भी करेंगे और मंत्रालय भी संभालेंगे। घर में किसानी का काम भी करेंगे, ताकि मेरे काम को देखकर अन्य लोग भी प्रेरित हों।’ ‘शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती। अन्य नौकरियों में रहते हुए लोग आईएएस, आईपीएस की तैयारी करते हैं और सफल भी होते हैं। मंत्री बनने के बाद कुछ लोगों ने कहा कि 10वीं पास को शिक्षा मंत्री बना दिया है, यह क्या सुधार करेगा राज्य की शिक्षा व्यवस्था में।’ शिक्षा मंत्री ने कहा कि उनके अंदर कुछ करने का जज्बा है। वह ऐसे लोगों को कुछ नहीं कहेंगे। विधिवत पढ़ाई करके इंटर की परीक्षा पास करेंगे, वही आलोचकों को उनका जवाब होगा।

गौरतलब है कि वर्तमान में झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने वर्ष 1995 में चंद्रपुरा प्रखंड के नेहरू उच्च विद्यालय तेलो से मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की थी। देवी महतो महाविद्यालय की स्थापना मंत्री के सहयोग से ही हुई थी। अतः अपने द्वारा स्थापित महाविद्यालय में अब स्वयं शिक्षा ग्रहण करेंगे। उन्होंने बताया कि उनकी यह कोशिश है कि गरीब विद्यार्थियों को निःशुल्क बेहत्तर शिक्षा मिल सके, इसके लिए वे लगातार प्रयासरत है। जब से वे विधायक बने हैं, गरीब बच्चों की उच्च शिक्षा पर होने वाले खर्च का वहन कर रहे हैं।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सासंद दीपक प्रकाश ने कहा कि हमारे आरोप के चलते अगर मंत्री जी उच्च शिक्षा ले रहे हैं, तो ये खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि मंत्री जी नई शिक्षा नीति का विरोध कर रहे हैं। लेकिन पहले उन्हें इसके बारे में जान लेना चाहिए। हालांकि ये भी देखना होगा कि राज्य के शिक्षामंत्री वाकई आगे की शिक्षा ग्रहण करने को लेकर संजीदा हैं या फिर मीडिया में बने रहने के लिए ये एक नया स्टंट है।

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