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राफेल विमान की हवा में ईंधन भरने की तस्वीरें देख हर भारतीय हो रहा गौरवान्वित

भारत को फ्रांस से पहली खेप में पांच राफेल विमान मिल चुके हैं। सभी विमान फ्रांस से उड़ान भरकर भारत आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, कल बुधवार को ये पांचों राफेल विमान भारत की जमीं पर पहुंचते हुए इतिहास बना देंगे। रविवार को लगातार सात घंटे की यात्रा के बाद ये विमान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल दफ्रा एयरबेस पर उतरे थे। वहां पायलट और जेट्स को आराम देने के लिए रोका गया था। योजना के मुताबिक, राफेल विमानों ने अल दफ्रा से उड़ान भर ली है और अब उनका बीच में कहीं हॉल्ट नहीं है। अतः यह स्पष्ट है कि अब राफेल बुधवार को भारत पहुंच जाएंगे। बता दें कि अल दफ्रा से उड़ान भरने के बाद रास्ते में राफेल में हवा में ही ईंधन भरा गया है। भारतीय वायुसेना ने उड़ते हुए विमानों में ईंधन भरे जाने की तस्वीरें ट्विटर पर शेयर की हैं। इन तस्वीरों को देखते हुए हर भारतीय गौरवान्वित महसूस कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, 30,000 फुट की ऊंचाई से ये तस्वीरें ली गई हैं।

 

कल बुधवार 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पर सारे राफेल उतरेंगे। सुरक्षा की दृष्टि से अंबाला एयरफोर्स के आसपास इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है। साथ ही, आसपास के इलाके को नो ड्रोन जोन भी घोषित कर दिया है। राफेल लड़ाकू विमानों को हवा में रीफ्यूलिंग के लिए भारतीय वायुसेना ने फ्रांसीसी एयरफोर्स को उसके सहयोग के लिए शुक्रिया अदा किया है।

बता दें कि राफेल का हिंदी में मतलब है ‘आग का गोला’। गौरतलब है कि चीन और पाकिस्‍तान के साथ जारी तनाव के बीच इंडियन एयरफोर्स के हथियारों के जखीरे में राफेल नाम के ‘ब्रह्मास्‍त्र’ शामिल होने जा रहे हैं।
भारत आ रहे पांच राफेल में तीन सिंगल सीटर जेट्स हैं जबकि दो ट्विन सीटर हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना के पायलट्स ही उड़ाकर भारत ला रहे हैं। अत्‍याधुनिक मिसाइलों और घातक बमों से लैस भारतीय वायुसेना के सबसे घातक फाइटर जेट राफेल को उड़ाने के लिए कुल 12 पायलटों को ट्रेनिंग दी गई है। राफेल विमानों के रवाना होने से पहले फ्रांस में भारतीय दूतावास ने इन राफेल विमानों और इंडियन एयरफोर्स के जाबांज पायलटों की तस्‍वीर भी जारी की।

बता दें कि भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट 7000 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करके बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंचेंगे। फ्रांस के मेरिनेक एयरबेस से इन पांच राफेल लड़ाकू विमान ने कल उड़ान भरी थी। फ्रांस से राफेल विमानों को 17 गोल्डेन एरोज कमांडिंग आफीसर्स के पायलट लेकर आ रहे हैं। सभी पायलटों को फ्रांसीसी दसॉल्ट एविएशन कंपनी द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। भारत ने राफेल में अपनी जरूरतों के हिसाब से कुछ बदलाव भी करवाए हैं। इसमें इजरायल के हेलमेट माउंट डिस्प्ले के साथ ही रडार वार्निंग रिसीवर, लो बैंड जैमर, दस घंटे की फ्लाइट डाटा रिकार्डिंग और ट्रैकिंग सिस्टम समेत कई अन्य सुविधाएं भी हैं। भारत आ रहे राफेल विमानों की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए इसमें फ्रांस निर्मित हैमर मिसाइल लगाने की तैयारी हो रही है। ये मिसाइल 60 से 70 किमी की दूरी पर भी मजबूत से मजबूत लक्ष्य को ध्वस्त करने में सक्षम हैं। हाइली एजाइल माड्युलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज (हैमर) हवा से जमीन पर मार करने वाली मीडियम रेंज की मिसाइल है। यह मिसाइल शुरुआत में फ्रांस की वायुसेना और नौसेना के लिए बनाई गई थी।

36 लड़ाकू विमान का यह सौदा भारत ने 2016 में फ्रांस से 60 हजार करोड़ रुपये में किया था। इस मिसाइल से भारतीय वायुसेना दुश्मनों के बंकर पर सटीक निशाना बना सकती है। राफेल विमानों में इस्तेमाल होने वाली स्कैल्प और मीटियोर मिसाइल पहले ही भारत पहुंच चुकी हैं। राफेल से भारतीय वायुसेना की मौजूदा ताकत में जबर्दस्त इजाफा होगा क्योंकि पांचवी जेनरेशन के इस लड़ाकू जेट की मारक क्षमता जैसा लड़ाकू विमान चीन और पाकिस्तान के पास भी नहीं हैं।

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