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आतंकी विकास दुबे और हैदराबाद ‘एनकाउंटर’: सड़क पर ही इंसाफ़, लोगों में जश्न और वही सवाल

अपराधी विकास दुबे की मौत ने हैदराबाद पुलिस के उस एनकाउंटर की याद दिला दी है जिसमें एक डॉक्टर के साथ गैंगरेप मामले में सभी चार आरोपियों को मार दिया गया था.

हालांकि ये दोनों अलग-अलग घटनाएं हैं लेकिन क़ानून के जानकारों को कहना है कि दोनों ही मामलों में क़ानून के शासन को ताक पर रख दिया गया था.. लॉकअप में कोई भी मौत हो या मुठभेड़ में, ये क़ानून के शासन का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है. किसी को भी चाहे वो पुलिस ही क्यों न हो, क़ानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए.”

तकरीबन आठ महीने पहले, शमशाबाद के पास एक नौजवान वेटरिनरी डॉक्टर की गैंगरेप के अगले दिन ही साइबराबाद पुलिस ने दो ट्रक ड्राइवरों और उनके दो हेल्परों को गिरफ़्तार किया था..गिरफ़्तार किए गए चारों लोगों पर उस महिला की गैंग रेप का आरोप लगाया गया था. छह दिसंबर को पुलिस इन चारों लोगों को मौका-ए-वारदात पर ‘तफ़्तीश के इरादे’ से ले गई. इसी जगह पर उस लड़की को जला दिया गया था..पुलिस ने दावा किया कि दो अभियुक्तों ने उनका रिवॉल्वर छीनने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने सभी अभियुक्तों पर गोलियां चलाईं..हैदराबाद की उस गैंग रेप की घटना और उसके बाद हुए एनकाउंटर, दोनों ही मामलों को लेकर देश भर में बहस और हंगामा हुआ. लेकिन चौंकाने वाली सबसे बड़ी बात ये थी कि लोगों ने अभियुक्तों के मारे जाने पर जश्न मनाया…वहीं विकास दुबे मामले में भी लोग विकास की मौत वपर जश्न मना रहे हैं..कानपुर के बिकरू गांव में लोग खुशियां बांट रहे हैं..मिठाइयां खिला रहे हैं..समय भारत से लोगों ने बात करते हुए कहा कि बिकर गांव अब आजाद हो गया है..वो आजादी जो अब तक विकास दुबे यानी की पंडित नाम से प्रख्यात इस आतंकी के होने से यहां के लोगों को शायद कभी मिली हीं नहीं

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