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भूटान ने रोका भारतीयों को मिलने वाला पानी, असम के किसान हुए परेशान

भारत-पाक सीमा पर लंबे समय से चल रहे सैन्य संघर्ष में उलझे हुए भारत देश को पिछले दिनों भारत-चीन सीमा पर चीनी सेना से झड़प का सामना करना पड़ा था । अभी भारत-चीन सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत का सिलसिला चल ही रहा था कि अचानक भारत के एक और पड़ोसी देश भूटान ने भारत को आंखें दिखानी शुरू कर दी है । साथ ही, नेपाल ने भी बिहार में अपनी भूमि का दावा करते हुए अपने संविधान में संशोधन तक कर दिया और भारत-नेपाल सीमा पर नदी तटबंधों के भारतीय मरम्मत कार्य को रोकने के लिए बाधाओं को खड़ा करना शुरू कर दिया । अतः कहा जा सकता है कि भारत की लगभग सभी तटीय सीमा पर माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं ।
पड़ोसी देश भूटान ने भारत के असम राज्य के सीमावर्ती इलाकों में जाने वाले सिंचाई के पानी को अचानक रोक दिया है। भूटान सरकार के इस फैसले से सीधे-सीधे असम के हज़ारों किसान परिवार प्रभावित हो रहे हैं। भूटान के पानी रोकने के कारण परेशान किसानों ने 24 जून को असम की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन भी किया। किसानों ने प्रदर्शन करते हुए असम की सरकार से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की है । वहीं भूटान सरकार का कहना है कि उसने ये फैसला कोरोना लॉकडाउन के चलते लिया है।


पानी रोके जाने से धान की खेती करने वाले किसानों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं । कालीपुर-बोगाजुली-कालानदी आंचलिक डोंग बांध समिति के बैनर तले प्रदर्शन में शामिल एक किसान नरोराम नार्जरी कहते हैं, “हमने पहले की तरह इस साल भी अपने धान के खेतों में पौधों को रोपने की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन अचानक पता चला कि भूटान ने नहर के जरिए आने वाली पानी के बहाव को रोक दिया है। इससे हमारे लिए भारी मुसीबत पैदा हो जाएगी।”
स्थानीय मीडिया संस्थान ‘ रिपोर्ट डॉट कॉम’ के मुताबिक असम के 25 गांवों से संबंधित किसानों ने भूटान के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए रोंगा और भूटान को जोड़ने वाली सड़क को जाम कर दिया। इस प्रदर्शन से यातायात कई घंटे तक रूका रहा । असम के स्थानीय मीडिया संस्थान ‘ईस्ट मोजो’ के मुताबिक 1953 से ही भूटान असम के सीमावर्ती इलाकों में पानी उपलब्ध करा रहा है। यहां के किसान सिंचाई के लिए भूटान के ही सिंचाई चैनल पर निर्भर थे। असम के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले किसान पूर्णतः कालिंदी नदी के पानी पर आश्रित हैं।
अब देखना होगा कि पाकिस्तान, नेपाल, चीन के बाद भारत अब भूटान देश के साथ मौजूदा परिस्थितियों में कैसे सामंजस्य स्थापित कर पाता है ।

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