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अमेरिका ने एच-1बी वीजा पर लगाई रोक, भारतीयों को लगा बड़ा झटका

कोरोनावायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते पूरे विश्व में आर्थिक स्थिति गड़बड़ा चुकी है । जिससे बहुत से देश समय और संकट का गहराई से अध्ययन करते हुए संबंधित क्षेत्रों के नियमों में संशोधन करते नजर आ रहे हैं । अमेरिकी कामगारों की आर्थिक रक्षा बनाए रखने के लिए अमेरिकी सरकार ने भी वीजा से संबंधित नियमों में बदलाव करने की घोषणा कर दी है । जिसके तहत दिसंबर 2020 तक एच-1 बी वीजा समेत अन्य कार्य वीजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड करने के लिए आदेश जारी किया है । इसके बाद व्हाइट हाउस द्वारा इस मामले पर टिप्पणी की गई कि “अमेरिका योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली की ओर बढ़ रहा है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों के काम की रक्षा की जाएगी” सरकार उन सभी खामियों को दूर करने के लिए वचनबद्ध है जिसका फायदा उठाकर  कंपनियां अमेरिकी कामगारों की जगह कम वेतन पर काम करने वाले विदेश कर्मचारी रखते हैं।
गौरतलब है कि एच-1 बी वीजा एक गैर प्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को कुछ खास व्यवसायों में नियोजित करने की अनुमति देता है । भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच इसकी काफी अधिक मांग है, जिसका अर्थ है कि इस नियम के बाद भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है । एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार अमेरिका में हर साल 85,000 एच-1 बी जारी करने की सीमा है । पिछले साल इस वीजा के लिए 2,25,000 आवेदन प्राप्त हुए थे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने कई अन्य फॉरेन वर्क वीजा भी सस्पेंड किए हैं। इसमें एच-2बी, एल और जे-वीजा भी शामिल हैं। जे-वीजा इंटर्न, ट्रेनी, शिक्षक, कैंप काउंसलर या समर वर्क ट्रेवल प्रोग्राम के लिए ये वीजा जारी किया जाता है।
डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए यह प्रतिबंध 24 जून से लागू होंगे। कहा जा रहा है कि नवंबर 2020 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों को अपने पाले में करने के लिए यह बदलाव किया है ।

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