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सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दी भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की इजाजत

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस०ए०बोबड़े की अगुवाई वाली बेंच ने उड़ीसा के पूरी में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की इजाजत दे दी है । इस बेंच में सीजेआई एसए बोवडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी शामिल रहें । सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि वह उड़ीसा सरकार और मंदिर मैनेजमेंट ट्रस्ट पर रथयात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी छोड़ते हैं। इससे पहले कोरोना वायरस को देखते हुए पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कई पहलुओं पर चर्चा करते हुए सशर्त रथ यात्रा की अनुमति दे दी है।
उड़ीसा विकास परिषद की ओर से याचिकाकर्ता रंजीत कुमार ने कहा कि सिर्फ जिम्मेदार लोगों को रथयात्रा में रखा जाए। सभी को इजाजत दी गई तो ज्यादा भीड़ होगी। सुनवाई के दौरान उड़ीसा सरकार के वकील हरीश साल्वे ने बेंच को कहा कि यात्रा पूरे राज्य में नहीं होगा। वहां कर्फ्यू लगा दिया जाए और सिर्फ सेवादार और पुजारी रथयात्रा में शामिल हों जिनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव हो।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि लोगों की सेफ्टी के साथ कोई समझौता नहीं होगा और हेल्थ का पूरा खयाल रखा जाएगा। पूरे उड़ीसा में नहीं बल्कि पूरी में रथयात्रा की इजाजत दी जाए।
ओड़िशा में रथ यात्रा का इतिहास सदियों पुराना है । इतिहासकार असित मोहंती के मुताबिक ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार रथ यात्रा की शुरूआत 13 वीं शताब्दी से शुरू हुई थी । सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है। अगर भगवान जगन्नाथ कल 23 जून को नहीं आएंगे, तो वे परंपराओं के अनुसार 12 साल तक नहीं आ सकते हैं ।  

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