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किराया माफी की अपील करने पर वकील पर लगा दस हजार रुपए जुर्माना

कोरोनावायरस जैसी वैश्विक महामारी से जहां सम्पूर्ण विश्व प्रभावित है । हर देश की अर्थव्यवस्था डांवाडोल हो चुकी है । कुछ समय तक दैनिक वेतनभोगी मजदूरों को एक वक्त का भोजन जुटाने में अनेक प्रयत्न करने पड़ते थे । बहुत से मजदूर अपने गांवों की तरफ पैदल, बस , रेलगाड़ियों में लौट चुके हैं । शहरों में किराए पर मकान लेकर रह रहे लोगों को मकान मालिक द्वारा किराया मांगने पर एक नई मुसीबत नजर आ रही है । इसी मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए दिल्ली के कुछ किरायेदारों ने एक वकील के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में पीआईएल दायर कर गुहार लगाई थी कि कोरोना महामारी बने रहने तक कोर्ट मकान मालिकों को किराया माफ करने का आदेश दे । जो किराएदार किराया नहीं दे पा रहे हैं उनसे मकान खाली ना कराया जाए ।
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने पीआईएल खारिज करते हुए कहा कि मकान मालिकों को कांट्रेक्ट के आधार पर किराया लेने का अधिकार है । इस आर्थिक संकट में बहुत से मकान मालिक भी किराए पर ही निर्भर हो सकते हैं । चीफ जस्टिस डी०एन०पटेल, जस्टिस प्रतीक जलान की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए याचिका दायर करने वाले वकील पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया । यह रकम कोरोना से राहत के काम में इस्तेमाल की जाएगी ।

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